विदुर नीति

विदुर नीति: इन 6 लोगों को गवाह बनाने से बचें!

इन लोगों को गवाह बनाने से बचना चाहिए

हम सभी एक खुशहाल ज़िंदगी जीने की चाह रखते हैं और जब किसी मुसिबत में फंस जाते हैं, तो हम खुद को उससे बाहर निकालने में जुट जाते हैं, फिर चाहे हमें इसके लिए गवाह भी क्यों ना जुटाना पड़ जाए। ध्यान रखें कि यह ज़रूरी नहीं है कि आप जिसपर आंख बंद करके विश्वास करते हैं, वह सच में आपके विश्वास के लायक हो। विदुर नीति की मानें तो ऐसे 6 लोग हैं जिनको भूलकर भी गवाह नहीं बनाना चाहिए…

आपके मन में भी यह सवाल ज़रूर आ रहा होगा कि भला कौन वह 6 लोग हैं… जिनको अपना गवाह बनाने से आपको बचना होगा –

• हाथ देखने वाला (हस्त रेखा) व्यकित

कहते हैं जिस इंसान के पास हाथ देखने की विद्या हो वह कभी किसी का गवाह नहीं बन सकता है क्योंकि वह कभी निष्पक्ष बात नहीं कर सकता है। ऐसे व्यक्ति अपने फायदे के अनुसार ही बात करते हैं इसलिए इनको अपना गवाह बनाने से बचना बहुत ज़रूरी है।

• चोरी कर के काम करने वाला व्यक्ति

वहीं, जो व्यक्ति ज्यादा पैसे की लालच में चोरी करते हैं, बेइमानी करते हैं और ईमानदारी से अपना कोई काम या व्यापार नहीं करता है वह भी किसी का सगा नहीं होता है और ऐसे लोग भी किसी का गवाह बनने के योग्य नहीं होते हैं। आपके लिए अच्छा यही होगा कि आप ऐसे व्यक्ति को कभी अपना गवाह ना बनाएं।

• जुआ खेलने वाला व्यक्ति

जुआ खेलने वाला व्यक्ति सिर्फ खुद के लिए और जुए के लिए सोचता है और उसी के लिए जीता है। जुआ खेलना एक नशा है और जिस व्यक्ति को इस नशे की लत्त लगी होती है उस पर विश्वास करना मूर्खता के समान है और ऐसे इंसान को अपना गवाह बनाना तो आपके लिए मूर्खता नहीं गुनाह साबित होगा।

• वैद्य या कोई चिकित्सक

यूं तो जब हम बीमार होते हैं, तो हमारे लिए वैद्य और चिकित्सक के बिना कुछ नहीं सूझता है। इसमें कोई शक नहीं है कि यह बहुत ही ज्ञानी होते हैं, लेकिन सत्य यह भी है कि यह कभी निष्पक्ष होकर किसी के लिए गवाही नहीं देते हैं। यह सिर्फ अपनी ही दवा और औषधियों की तारीफ करते हैं और यह कहते हैं कि उनके ही दवा से मरीज ठीक हो सकता है। ऐसे में इन व्यक्तियों को अपना गवाह बनाना खतरे से खाली नहीं है।

• शत्रु

वैसे तो हर कोई अपने शत्रु से कोसो दूर रहने में ही भलायी समझता है, क्योंकि आपका शत्रु कभी आपका अच्छा नहीं सोच सकता है। शत्रु सिर्फ बुरा सोचता है और शत्रु पर विश्वास करना किसी मूर्खता से कम बात नहीं है। अगर कभी ऐसे हालात पैदा हो जाते हैं कि आपको अपने शत्रु को गवाह बनाना पड़ रहा हो, तब भी आप उस पर विश्वास ना करें, क्योंकि शत्रु सिर्फ आपका विश्वास तोड़ने की ही ताक पर बैठे रहते हैं।

• मित्र

जिस तरह एक शत्रु कभी आपका भला नहीं सोच सकता है और वह आपके लिए गवाह नहीं बन सकता है। ठीक उसी तरह आपका मित्र भी आपका निष्पक्ष गवाह नहीं हो सकता है, क्योंकि एक मित्र कभी आपका बुरा नहीं चाहेगा और हमेशा आपका ही पक्ष लेगा। याद रखें कि एक गवाह के तौर पर आपका मित्र भी सही चुनाव साबित नहीं होगा, इसलिए इनसे भी आपको बचने में भलाई ही होगी।

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