महाभारत विदुर नीति

धन में बढ़ोत्तरी चाहते हैं तो अपनाएं यह 3 विदुर नीतियां

विदुर के बारे में आपने ज़रूर सुना या फिर पढ़ा होगा… वह बहुत ही विद्वान थे। महाभारत काल में वह हस्तिनापुर के प्रधानमंत्री और कौरवों व पांडवो के काका भी थे। हालांकि राजा पुत्र होने के बावजूद उन्हें कभी भी राजकाज नहीं सौंपा गया और ऐसा इसलिए क्योंकि उनका जन्म ऋषि वेदव्यास के आशीर्वाद से एक दासी के गर्भ से हुआ था, लेकिन ऋषि वेदव्यास के आशीर्वाद के कारण वह बहुत ही बुद्धिमान और विद्वान थे

यूं तो विदुर नीति में कई अच्छी बातों का ज़िक्र है और उन्हीं में से एक है धन का सही प्रबंधन और सही तरह से निवेश करना जो बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यह सत्य है कि अगर आप धन की कमाई सही तरह से करें और साथ ही सही ढंग से उसे खर्च किया करें, तो आपको ज़रूर लाभ की प्राप्ति होगी व धन में बढ़ोत्तरी भी होगी।

आज वेद संसार आपको बताने जा रहा है कि कैसे आप अपने धन की बढ़ोत्तरी कर सकते हैं इन विदूर नीतियों को अपनाकर –

• ईमानदारी और मेहनत से करें काम –

विदुर नीति के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अच्छे व मंगल कर्म करता है, तो मां लक्ष्मी ज़रूर वास करती हैं। साफ शब्दों में कहे तो ईमानदारी और मेहनत से आपको अपना काम करते रहना चाहिए। वहीं, धन का संतुलन बनाने के लिए आय और व्यय सही तरह से किया जाना भी बहुत ज़रूरी है। और हां, एक बात का ध्यान रखें कि धन के हमेशा सही से सोच समझ कर उपयोग किया जाना चाहिए। ऐसा करने से धन की बचत तो होगी ही व साथ ही बढ़ोत्तरी भी अवश्य होगी। कोशिश यही करें कि आप अपने धन को सही और आय बढ़ाने वाले कार्यों में ही लगाएं क्योंकि तभी धन की बढ़ोत्तरी तेज़ी से होती है। याद रहें कि धन की कमाई और खर्च अगर आप सही तरह से करते हैं, तो निश्चित ही आपको लाभ की प्राप्ति होती है।

• मानिसक, शारीरिक एवं वैचारिक संयम बरते –

वहीं, विदुर नीति में इस बात का भी उल्लेख है कि धन का बचाव तभी हो सकता है जब इंसान अपना मानसिक, शारीरिक एवं वैचारिक संयम को बरते। यानी कि अपने शौक को पूरा करने या बिना आवश्यकता के भौतिक सुखो की पूर्ति के लिए अपने धन का गलत उपयोग ना करें और ना खर्च करें। एक बात गांठ बांध लें कि धन तभी खर्च करना चाहिए जब आवश्यकता हो।

• अपनी क्षमता के अनुसार करें दान  –

विदुर नीति में यह भी कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति के पास धन व धान्य की कोई कमी नहीं है तो उसे ज़रूर अपनी क्षमता के अनुसार दान करना चाहिए। बता दें कि दान करना जीवन में सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। दान करने वाले व्यक्ति का ना सिर्फ मान-सम्मान बढ़ता है, बल्कि धन में भी बढ़ोत्तरी होती है। याद रखें कि जो भी व्यक्ति अपने धन का ना तो सही तरह से भोग करता है और ना ही उसका दान करता है तो ऐसे धन का नाश ज़रूर हो जाता है, इसलिए कहा जाता है कि अपने धन का दान अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए और उसे बुद्धिपूर्वक उपभोग करना भी आवश्यक माना जाता है।

दोस्तों एक बात याद रखें कि एक जगह ठहरे हुए धन की आयु बहुत ही कम होती है।

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