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कार्तिक मास में दीया जलाने की विधि, जानें इसके लाभ!

कार्तिक मास में दीया जलाने की विधि

यूं तो हर कोई पूजा करता है और दीया जलाता है, लेकिन आपने ज़रूर अपने घरों में अपने बड़े-बुजुर्गों को कार्तिक मास के शुरू हो जाते ही दीया जलाने की परंपरा देखी होगी। क्या आपके मन में कभी यह सवाल आया है कि आखिर कार्तिक मास में दीया जलाने की यह कैसी विधि है???

दरअसल, पदमपुराण के अनुसार कार्तिक माह में शुद्ध घी अथवा तिलों के तेल से दीपक जलाना बहुत शुभ माना गया है। कहते हैं कि ऐसा करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है। वहीं, मंदिरों में और नदी के किनारे दीपदान करने से भी मां लक्ष्मी की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। बता दें कि इस खास माह में दीपदान करने से भगवान विष्णु की कृपा आसानी से प्राप्त हो जाती है और जीवन में छाया हुआ अंधकार दूर हो जाता है और दीये की रोशनी की तरह जगमगाने लगता है व साथ ही व्यक्ति के भाग्य में भी वृद्धि होती है।

कार्तिक मास में दीप दान करने का महत्व 

कार्तिक मास में दीप दान करने का महत्व 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भगवान के मंदिर में दीप दान करने वालों के घर सदा खुशहाल रहते हैं, लेकिन वहीं, कार्तिक मास में खासकर के दीपदान की असीम महिमा मानी गई है। इस मास में वैसे तो आप किसी भी देव मंदिर में जाकर रात्रि जागरण कर सकते हैं, परंतु यदि किसी कारण वश आपका मंदिर में जाना सम्भव ना हो तो, किसी पीपल व वट वृक्ष के नीचे बैठकर अथवा तुलसी के पास दीपक जलाकर भी आप प्रभु नाम की महिमा का गुणगान कर सकते हैं। बता दें कि इस मास में भूमि पर शयन करना भी बहुत उत्तम माना गया है।

भगवान विष्णु व पितरों को दीपदान कर कैसे करें प्रसन्न –

अगर आप अपने पितरों को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो आकाश में दीपदान अवश्य करें क्योंकि यह विधि बहुत महान मानी गई है। जान लें कि जो लोग भगवान विष्णु के लिए आकाश में दीप का दान करते हैं, उन्हें कभी भी क्रूर मुख वाले यमराज का दर्शन नहीं करना पड़ता है। यही नहीं, जो लोग अपने पितरों के लिए नियमित रूप से आकाश में दीपदान करते हैं, उनके नरक में पड़े पितर भी उत्तम गति को प्राप्त करते हैं। ध्यान रहें कि जो लोग नदी किनारे, देवालय, सड़क के चौराहे पर दीपदान करते हैं उन्हें सर्वतोमुखी मां लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

दीपक ना जला सकें तो क्या करें –

दोस्तों हर किसी के पास पर्याप्त धन या फिर समय नहीं होता, तो ऐसे में अगर आपके पास दीपक जलाने की सुविधा ना हो तो स्कंदपुराण के अनुसार आप किसी भी बुझे हुए दीपक को जलाकर अथवा उसे हवा के तेज झोंकों से बचाकर भगवान की असीम कृपा के भागीदार बन सकते हैं क्योंकि दीपक को बुझने से रोकने वाला भक्त भी प्रभु की कृपा का पात्र बन जाता है। याद रहें कि इस मास में भूमि पर शयन करना भी उत्तम कर्म माना गया है।

भगवान कृष्ण के सामने दीपक जलाने के फायदे –

भगवान कृष्ण के सामने दीपक जलाने के फायदे -

क्या आप भगवान श्रीकृष्ण के भक्त हैं… अगर हां तो आप उनके सामने दीपक ज़रूर से जलाए, क्योंकि ऐसा करने से जीवन साथी की तलाश पूरी हो जाएगी। वहीं, दूसरी ओर रूक्मणी और श्रीकृष्ण के आगे दीपक लगाने से मनभावन जीवन साथी की प्राप्ति होती है।
बताते चलें कि दीपक की लौ को पूर्व दिशा में अगर आप रखते हैं तो इससे व्यक्ति दीर्घजीवन जीता है और उत्तर दिशा में दीपक की लौ रखने से धन और प्रसन्नता बढ़ती है।

तो दोस्तों इस कार्तिक मास आप दीपकदान ज़रूर से करें और भगवान से आशीर्वाद पाकर खुशहाल जीवन व्यतित करें।

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