ज्योतिष राशिफल

ऐसे जानें अपनी सही राशि ?

हममें से बहुत से लोग अपनी राशि के बारे में नहीं जानते हैं… जहां कोई अपने पुकार के नाम को सही राशि मान बैठता है, तो वहीं, कोई जन्म कुंडली के नाम से और कोई अंकों के अनुसार। छोटी उम्र यानि कि बच्चे से बड़े होने तक यह तय ही नहीं हो पाता है कि आपकी कौन सी है असली राशि?

बता दें कि ज्योतिष के पांच प्रमुख अंग माने गए हैं और इन्हीं के जरिए यह जाना जा सकता है कि पैदा होने वाले जीव का स्वभाव कैसा होगा। आने वाले समय में उस पर किस प्रकार से कौन-कौन से ग्रह का असर होगा… ग्रहों-नक्षत्रों की गति पल-पल बदलती रहती है और इसी के अनुसार हर प्राणी भी उससे प्रभावित होता है।

सौर या सूर्य आधारित राशि, यहां जानें

 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सूर्य जिस राशि में मौजूद होता है, उसी के अनुसार राशि का निर्धारण किया जाता है। इस पद्धति के अनुसार पूरे एक माह तक पैदा होने वाले जातकों की एक ही राशि होती है। 21 मार्च-20 अप्रैल तक जन्मेंं लोगों की राशि मेष होती है, वहीं, 21 अप्रैल-20 मई तक वृष, 21 मई-21 जून तक मिथुन, 22 जून-22 जुलाई तक कर्क, 23 जुलाई-23 अगस्त तक सिंह, 24 अगस्त से 23 सितम्बर तक कन्या, 24 सितम्बर से 22 अक्तूबर तक तुला, 23 अक्तूबर-22 नवम्बर तक वृश्चिक, 23 नवम्बर-21 दिसम्बर तक धनु, 22 दिसम्बर -21 जनवरी तक मकर, 22 जनवरी से 21 फरवरी तक कुंभ और 22 फरवरी से 20 मार्च तक जन्मे लोग मीन राशि के माने जाते हैं।

चंद्र आधारित राशि, यहां जानें

चंद्र आधारित राशि, यहां जानें 

दूसरी ओर वैदिक ज्योतिष के अनुसार राशि का निर्धारण नक्षत्रों को आधार मानकर चंद्रमा की उपस्थिति के अनुसार भी किया जाता है। दरअसल, पूरा भूमंडल गोल होने के कारण 360 अंश मान को 12 बराबर भागों में बांट कर 30 अंश की एक राशि मानी गई है। यह नहीं, हमारे 27 नक्षत्रों के चार भाग कर कुल 108 चरण बनाए गए हैं। ध्यान रहे कि प्रत्येक राशि में सवा दो नक्षत्र (9 चरण) शामिल कर बारह राशियां बनाई गई हैं और इस प्रकार वैदिक रीति से चंद्र आधारित राशियों में समय की सूक्ष्म इकाई का आप प्रयोग कर भविष्य कथन कर सकते हैं ,क्योंकि यह ज्यादा सटीक माना जाता है।

अंक शास्त्र के जरिए कैसे होती है भविष्यवाणी

बात अगर अंक शास्त्र की करें तो इसमें राशि न होकर मूल 9 अंकों को प्रत्येक ग्रह का स्वामित्व और अंक की विशिष्ट राशि प्रदान करने की अवधारणा है। स्वामित्व के आधार पर भविष्य कथन किया जाता है। इस शास्त्र के अनुसार शून्य को ब्रह्मांड का प्रतीक मानते हुए पूर्ण अंक की संज्ञा नहीं दी गई है और साथ ही तीन प्रकार के नामांक, मूलांक और भाग्यांक के आधार पर भविष्य बताया जाता है, जैसे कि –
1 अंक के स्वामी सूर्य व राशि सिंह, 2 के स्वामी चंद्रमा व राशि कर्क, 3 के स्वामी गुरु व राशि धनु, 4 के स्वामी राहु व राशि कुंभ, 5 के स्वामी बुध और राशि मिथुन तथा कन्या, 6 के स्वामी शुक्र व राशि वृष, तुला, 7 अंक के स्वामी केतु व राशि मीन, 8 के स्वामी शनि व राशि मकर और 9 के स्वामी मंगल और राशि मेष व वृश्चिक है।

टैरो कार्ड और राशि

दोस्तों बहुत से लोग टैरो कार्ड पर भी यकीन करते हैं, ऐसे में इस पद्धति में राशि न होकर वैदिक ज्योतिष के प्रश्र लग्न के समान विधा ईजाद की गई है। किसी भी राशि या घटना या प्रश्न का उत्तर देने के लिए तीन कार्ड खोलकर निर्णय लिया जाता है।
पहले कार्ड से आपकी मानसिक स्थिति का आकलन, दूसरे कार्ड से आपके मन के विचार या समस्या का विश्लेषण और तीसरे के परिणाम के बारे में अनुमान किया जाता है। इसमें कार्ड रीडर की योग्यता और आध्यात्मिक शक्ति का प्रयोग ज्यादा-से-ज्यादा होता है।

तो दोस्तों हम आशा करते हैं कि अब आपकी यह राशि को लेकर दिमाग में चल रही दुविधा समाप्त हो गई होगी और आप अपनी सही राशि की जानकारी पाकर उसे और स्ट्रांग बनाने में जुट गए होंगे।

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