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विवाह पंचमी का महत्व और पूजा विधि

विवाह का हमारे जीवन में एक खास महत्व माना जाता है। विवाह ना सिर्फ दो लोगों का बल्कि आत्माओं का मिलन कहलाता है। विवाह एक ऐसा अनूठा बंधन होता है जिसे भगवान खुद जोड़ते हैं। इस पूरे संसार में सभी के लिए जीवनसाथी बनाया है बस उनसे मिलने भर की देर होती है और जब भगवान चाहते हैं तो दोनों को मिला भी देते हैं।

विवाह एक पवित्र बंधन होता है, जो एक परिवार को पूरा करता है। इन दिनों विवाह को लेकर लोग गंभीर नहीं दिखाई देते हैं, लेकिन जान लें कि विवाह ना आपको एक संपूर्ण इंसान बनने का मौका देता है, बल्कि कई जिम्मेदारियों को एक साथ निभाने का हौसला और ताकत दोनों देता है।

विवाह पंचमी कब मनायी जाती है

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी के खास दिन ही भगवान श्री राम और माता सीता की विवाह हुई थी। यही कारण है कि इस दिन को श्रीराम विवाहोत्सव के रूप में मनाया जाता है। बहुत से लोग इसे विवाह पंचमी भी कहते हैं।

विवाह पंचमी का महत्व –

विवाह पंचमी का महत्व

जहां एक ओर भगवान श्री राम चेतना का प्रतीक हैं तो वहीं, दूसरी ओर माता सीता प्रकृति शक्ति की प्रतिक मानी जाती है। वहीं, जब चेतना और प्रकृति का मिलन होता है तो यह दिन अपने आप में ही बहुक महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस खास दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह करवाना बहुत ही शुभ होता और ऐसा करने से आपकी सारी अधुरी इच्छाएं ज़रूर पूरी हो जाती हैं।

विवाह पंचमी की पूजा से मिल सकते हैं यह वरदान –

• अगर आपकी विवाह होने में बाधाएं आ रही हैं, तो विवाह पंचमी के दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह करवाएं, ऐसा करने से आपकी समस्या ज़रूर दूर हो जाएगी।

• सिर्फ विवाह जल्दी ठीक नहीं होता बल्कि विवाह पंचमी पूजा करने से आपको मनचाहा विवाह का वरदान भी मिलता है।

• वहीं, अगर आपकी शादी हो गई है और किसी कारण से वैवाहिक जीवन की गाड़ी सही मोड़ पर नहीं चल पा रही है, तो विवाह पंचमी की पूजा ज़रूर करें आपकी समस्याओं का अंत अवश्य से  हो जाएगा।

• ध्यान रहे कि इस दिन भगवान राम और माता सीता की संयुक्त रूप से उपासना करने से विवाह होने में आ रही सभी बाधाओं का नाश भी होता है।

• बता दें कि इस दिन बालकाण्ड में भगवान श्री राम और सीता के विवाह प्रसंग का पाठ करना भी बहुत शुभ माना जाता है।

•  इस शुभ दिन सम्पूर्ण रामचरितमानस का पाठ करने की कोशिश करें, क्योंकि ऐसा करने से आपका पारिवारिक जीवन सुखमय हो जाएगा।

भगवान श्री राम और माता सीता के विवाह की पूजा विधि

भगवान श्री राम और माता सीता के विवाह की पूजा विधि

• सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर भगवान श्री राम विवाह का संकल्प लें।

• अब जब आपका स्नान हो गया है, तो सारे विवाह के कार्यक्रम की शुरुआत करने के लिए तैयार हो जाइए।

• याद से भगवानन श्री राम और माता सीता की प्रतिकृति की स्थापना भी करें।

• ध्यान रहें कि भगवान राम को पीले और माता सीता को लाल वस्त्र ही अर्पित करें और उनके समक्ष बालकाण्ड में विवाह प्रसंग का पाठ करें  या “ॐ जानकीवल्लभाय नमः” का जाप भी करें।

• यही नहीं, इसके बाद माता सीता और भगवान श्री राम का गठबंधन करें और उनकी आरती करें।

• आरती हो जाने के बाद गांठ लगे वस्त्रों को अपने पास सुरक्षित ही रख लें।

भगवान श्री राम के यह खास 3 दोहे का करें जाप और पाएं लाभ –

1

प्रमुदित मुनिन्ह भावंरीं फेरीं। नेगसहित सब रीति निवेरीं॥

राम सीय सिर सेंदुर देहीं। सोभा कहि न जाति बिधि केहीं॥

2

पानिग्रहन जब कीन्ह महेसा। हियं हरषे तब सकल सुरेसा॥

बेदमन्त्र मुनिबर उच्चरहीं। जय जय जय संकर सुर करहीं॥

3

सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥

नारद बचन सदा सुचि साचा। सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा॥

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