ईवेंट हिन्दू पर्व

गुरु नानक जयंती क्यों मनायी जाती है, क्या है महत्व?

सिखों का सबसे पवित्र उत्सव माना जाता है गुरु नानक जयंती, क्योंकि इस दिन गुरु नानक देव जी का जन्मदिन मनाया जाता है। बता दें कि गुरु नानक देव सिख धर्म के संस्थापक थे। वह दस सिख गुरुओं में से पहले गुरु थे। सिखों द्वारा सभी गुरुओं के जन्मदिन मनाए जाते हैं और इसे ‘गुरुपर्व’ कहा जाता है। यह बहुत कम लोग जानते हैं कि गुरु नानक जयंती को गुरु नानक या गुरुपुरब भी लोग कहते हैं और कुछ लोग इसे गुरु नानक का प्रकाश उत्सव भी कहते है।

गुरु नानक जयंती कब मनायी जाती है

यूं तो गुरू नानक जी का जन्म 15 अप्रैल, 1469 को हुआ था लेकिन उनका जन्मदिन हिंदू कैलेंडर के अनुसार ‘कार्तिक’ महीने में यानि कि पूर्णिमा दिवस को मनाया जाता है।

गुरु नानक जयंती कहां मनायी जाती है

गुरु नानक जयंती कहां मनायी जाती है

गुरु नानक जयंती का यह महान पर्व खासकर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में पूरे 3 दिन तक बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। बात अगर सिख तीर्थयात्रियों की करें, तो विशेष रूप से ननकाना साहिब, (गुरु नानक के जन्मस्थान) और अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में बड़ी संख्या में भीड़ देखने को मिलती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह त्योहार सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में जैसे कि – यूके, कनाडा और अमेरिका सहित अन्य देशों में भी बहुत ही उत्साह और ख़ुशी के साथ मनाया जाता है।

गुरु नानक जयंती का महत्व

जैसा कि हमने पहले बताया कि गुरु नानक देव जो एक महान द्रष्टा और संत थे… उन्होंने दुनिया को आध्यात्मिकता, नैतिकता, मानवता, भक्ति और सच्चाई की गहन शिक्षाएं प्रदान की, इसलिए इस खास दिन को “प्रकाश उत्सव” भी कहकर लोग बुलाते हैं।

गुरु नानक जयंती की परंपरा और रीति रिवाज

गुरु नानक जयंती की परंपरा और रीति रिवाज

क्या आप जानते हैं कि पूरे उत्तर भारत में गुरु नानक जयंती का पर्व तीन दिनों तक बड़े स्तर पर मनाया जाता है। आज वेद संसार आपको गुरु नानक जयंती के ये खास 3 दिन के बारे में विस्तार से बताने जा रहा है –

पहला दिन – अखण्ड पाठ

गुरु नानक जयंती के पहले दिन सभी गुरुद्वारों को फूलों और रोशनी से सजा लिया जाता है और ना केवल गुरुद्वारों में बल्कि घरों में भी 48 घंटों तक पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ बिना रुके ही किया जाता है। ध्यान रहे कि यह ‘पाठ’ जन्मदिन की सुबह ही खत्म होता है।

दूसरे दिन – प्रभात फेरी

वहीं, गुरु नानक जयंती की शुरुआत स्तुति करते हुए एक धार्मिक जुलूस, ‘शब्द’ और ‘कीर्तन’ के रूप में, सुबह जल्दी निकाला जाता है और यह आस-पास की गलियों से गुजरता हुआ पास के गुरुद्वारा में समापन होता है।

जहां, दिन के दौरान ‘नगर कीर्तन’ नामक एक विशाल जुलूस शहर की मुख्य सड़कों पर निकाली जाती है, जो रंगीन बैनर और फूलों से सजा होता है वहीं, दूसरी ओर जुलूस के पांच सशस्त्र व्यक्तियों द्वारा नेतृत्व भी किया जाता है जिन्हें ‘पंज प्यारे’ कहा जाता है। जयंती के दूसरे दिन भक्त अपने साथ सिख झंडा लिए हुए रहते है जिसे ‘निशान साहिब’ कहते हैं और पवित्र भजन जपते हुए गुरु ग्रंथ साहिब को सजाते हुए एक पालकी के साथ झूंड में चलते है। यही नहीं, कुछ सिख जो पारंपरिक सिख होते हैं वह हथियारों के साथ पारंपरिक कपड़ों में नकली लड़ाई का प्रदर्शन भी करते हैं।

तीसरा दिन – गुरु नानक जयंती

सबसे खास दिन होता है तीसरा दिन, क्योंकि इसी दिन होती है गुरू नानक जयंती। बता दें कि गुरु नानक जयंती का वास्तविक दिन सुबह सूर्योदय से पहले शुरू हो जाता है, जिसमें कविताओं, भजन और उद्धरण (आसा-दे-वार) के गायन होते हैं, जो गुरु नानक की अनुकरणीय जीवन को कायम करते है। इसके बाद फिर ‘ग्रंथ साहिब’ से व्याख्यान और कीर्तनों के साथ ‘कथा’ की जाती है और ‘कर्हा प्रसाद’ वहां मौजूद सभी लोगों को वितरित किया जाता है।

पूजा-पाठ हो जाने के बाद लंगर ‘परोसा जाता है और फर्श पर बैठे हुए लोग साधारण भोजन ही ग्रहण करते है। गुरु नानक के सच्चे भक्त खाना पकाने, परोसने और प्लेटों को साफ करने में मदद करते हैं। इसे ‘सेवा’ कहा जाता है।

वहीं, सूर्यास्त के बाद प्रार्थना (रेहर) का पाठ किया जाता है जो देर रात तक चलती है। 1.20 बजे, गुरु गुरू नानक देव जी के जन्म के स्वागत के लिए भक्त, ‘गुरबानी’ गाते है। जन्मदिन के जश्न के एक रूप के पटाखें भी जलाये जाते है।

सच्ची श्रद्धा व भाव के साथ गुरु नानक जयंती का समारोह मध्यरात्रि 2 बजे तक चलता है।

वेद संसार की पूरी टीम की ओर से आप सभी को गुरु नानक जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।

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