हिन्दू पर्व

अक्षय नवमी और आंवले का क्या है कनेक्शन, जानें पूजा विधि !

अक्षय नवमी और आंवले का क्या है कनेक्शन

अक्षय नवमी अपने आप में बहुत खास माना जाता है। इस दिन जो इंसान पुण्य करता है, उसका फल उसे कई जन्मों तक मिलते रहता है। बता दें कि इस खास दिन दान, पूजा, भक्ति और सेवा जहां तक संभव हो व अपनी सामर्थ्य के अनुसार ज़रूर करें। वहीं, ध्यान रहे कि अगर गलती से भी आप शास्त्रों के विरूद्घ कोई काम करते हैं तो उसका पाप भी आपको कई जन्मों तक किसी न किसी रूप में भुगतना पड़ता है। इसलिए इस बात का खास ध्यान रखें कि आपसे ऐसा कोई काम ना हो जाए जिससे आपकी वजह से किसी को भी दुख पहुंचे।

अक्षय नवमी का पर्व क्या है

• कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि को ही आंवला नवमी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन से द्वापर युग का आरम्भ हुआ था।

• बता दें कि इस खास दिन के अगले दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया था।

• इस खास दिन आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन बनाना और करना बहुत शुभ माना जाता है।

• यही नहीं, इस दिन कुष्मांड का दान भी करना अत्यधिक शुभ माना जाता है।

अक्षय नवमी की खास 5 पूजा विधि

अक्षय नवमी की खास 5 पूजा विधि

• सबसे पहले इस दिन स्नान करके पूजा करने का संकल्प लें।

• सच्चे मन से प्रार्थना करें कि आंवले की पूजा से आपको सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का वरदान मिले।

• वहीं, आंवले के वृक्ष के निकट पूर्व मुख होकर उसमें जल डालें।

• अब वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें और कपूर से आरती करें।

• याद से आंवले के वृक्ष के नीचे ही निर्धनों को भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन करें।

आंवला नवमी से जुड़ी यह 5 खास बातें

• सुबह नहाने के पानी में आप आंवले का रस मिलाकर नहाना ना भूलें। बता दें कि ऐसा करने से आपके ईर्द-गिर्द जितनी भी नेगेटिव ऊर्जा होगी वह समाप्त हो जाएगी और सकारात्मकता व पवित्रता में बढ़ौतरी होगी। नहाने के बाद आंवले के पेड़ और देवी लक्ष्मी का पूजन अवश्य करें। ऐसा करने से आपको पुण्य की प्राप्ति होगी और साथ ही सारे पाप भी माफ हो जाएंगे।

• जैसा कि हमने पहले भी बताया है कि अक्षय नवमी के अवसर पर आंवले के पेड़ की पूजा करने का विधान है। कहते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु एवं शिव जी आंवले के पेड़ के पास आकर निवास करते हैं। याद रखें कि इस शुभ दिन स्नान, पूजन, तर्पण तथा अन्नदान करने का बहुत महत्व माना जाता है।

• वहीं, आंवले के पेड़ के नीचे झाड़ू से साफ-सफाई करें और फिर दूध, फूल एवं धूप से पूजन करें।

• आंवले के पेड़ की छाया में पहले ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और फिर खुद भी खाएं।

• आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भोजन करते वक्त अगर आपकी थाली में आंवले का पत्ता गिर जाता है, तो यह शुभ संकेत माना जाता हैं। मान्यता के अनुसार खाने के थाली में आंवले का पत्ता गिरना मतलब आने वाले समय में आपके सेहत में तंदरूस्ती आएगी। क्या आप जानते हैं कि आंवले के पेड़ के नीचे भोजन करने की प्रथा का आरंभ मां देवी लक्ष्मी ने ही किया था।

दोस्तों, बताते चलें कि आंवले की पूजा अथवा उसके नीचे बैठकर भोजन खाना संभव ना हो तो इस दिन याद से आंवला जरूर खाएं और साथ ही खुशहाल ज़िंदगी का स्वागत करें।

Leave a Comment