धार्मिक स्थल

एक ऐसा मंदिर जहां मरने के बाद आत्माओं के देना पड़ता है हाजिरी

हिमाचल प्रदेश में यमराज मंदिर

बात अगर पौराणिक ग्रंथों की करें, तो हमारी इस सृष्टि यानि कि पूरी दुनिया के रचियता भगवान विष्णु है। यूं तो सृष्टि की उत्पत्ति करने वाले भगवान विष्णु को हर कोई याद करता है और उनकी पूजा-पाठ भी करता है, लेकिन क्या आप में से किसी ने उनको याद किया है, जो हमें मोह-माया के इस जाल से मुक्त करते हैं? जवाब ज़रूर ना में ही होगा… जी हां, हम बात कर रहे हैं यमराज की जो हमारे पाप-पुण्य का फै़सला सुनाते हैं और दुनिया रूपी बंधन से हम सबको मुक्त करवाते हैं।

दंड के 3 देवता कौन है

हिंदू धर्म के अनुसार दंड के तीन देवता माने गए हैं और वह हैं – यमराज, शनिदेव और भैरव। वहीं, मार्कण्डेय पुराण में यमराज को दक्षिण दिशा के दिक्पाल और मृत्यु का देवता भी कहा गया है। अन्य ग्रंथों में देखेंगे तो पाएंगे कि इनका विवरण कुछ अनोखे ही रूप में पढ़ने-सुनने को मिलता है। यमराज की सवारी भैंसा है और इनके हाथ में सदैव गदा होती है।

यमराज का चित्रगुप्त से क्या है कनेक्शन –

यमराज का चित्रगुप्त से क्या है कनेक्शन

दोस्तों पौराणिक कथाओं की मानें तो यमराज के मुंशी हैं चित्रगुप्त भगवान और इन्हीं की मदद से वह सभी प्राणियों के कर्मों और पाप-पुण्य का लेखा-जोखा लिखा करते हैं।

आज वेद संसार आपको एक ऐसी ही जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां इंसान को मृत्यु के बाद ले जाया जाता है और यहां चित्रगुप्त द्वारा ही हर जीव के कर्मों का हिसाब दिया जाता है और फिर उसके बाद यमराज जीव द्वारा किए गए कर्मों के हिसाब से फै़सला करते हैं।

आइए जानते हैं यमराज के इस खास मंदिर के बारे में

यह खास स्थान भरमौर में यम मंदिर के नाम से काफी प्रसिद्ध है। बता दें कि यमराज का यह मंदिर हिमाचल प्रदेश में चम्बा के भरमौर नामक स्थान पर स्थित है। कार्तिक कृष्णा त्रयोदशी को यहां दीये जलाकर यमराज को काफी प्रसन्न किया जाता है। यूं तो देखने में यह आपको एक घर जैसा दिखाई देगा। इस अनोखी मंदिर में यमराज के साथ-साथ चित्रगुप्त भी विराजमान हैं।

इस मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि जब इंसान की मृत्यु हो जाती है, तो यमदूत उसकी आत्मा को इसी मंदिर में लाता है और चित्रगुप्त भगवान के सामने पेश करता है। इसके बाद सिलसिला चलता है हिसाब का… नहीं, समझे आप??? दरअसल, चित्रगुप्त जीव के अच्छे और बुरे कामों का हिसाब करते हैं और फिर आत्मा को चित्रगुप्त के सामने वाले कक्ष में यमराज के पास लेकर जाया जाता है। जान लें कि इस खास कमरे को यमराज की कचहरी कहा जाता है और यहां यमराज आत्मा के कर्मों के अनुसार फै़सला करता है।

यमराज की मंदिर की विशेषताएं –

आपके मन में कई सवाल उठ रहे होंगे कि भला यमराज की इस अनोखी मंदिर की आखिर क्या खासियत होगी – तो बता दें दोस्तों कि इस मंदिर के अंदर ही चार और द्वार हैं जो कि गुप्त हैं। यह द्वार सोना, चांदी, तांबे और लौहे के बने हुए हैं। आत्मा के कर्म के अनुसार ही उसे इन द्वारों से पार करवाते हुए स्वर्ग और नरक ले जाया जाता है। आपको बता दें कि गरुड़ पुराण में भी यमराज के इन चार द्वारों का उल्लेख विस्तार से किया गया है।

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