धार्मिक स्थल

तिरुपति बालाजी मंदिर के यह 10 सच क्या आप जानते हैं?

तिरुपति बालाजी मंदिर के यह सच क्या आप जानते हैं

हमारे देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है तिरुपति बालाजी मंदिर, जो काफी प्रसिद्ध मानी जाती है। इस मंदिर में ना सिर्फ आप या हम जैसे आम लोग ही दर्शन करने आते हैं बल्कि कई बड़े उद्योगपति, फिल्मी सितारे व राजनेताओं की लंबी लाइन भगवान तिरुपति की बस एक झलक पाने के लिए लगी रहती है। ऐसी मान्यता है कि यहां जो भी जन सच्चे मन के साथ आता है भगवान तिरुपति उनकी मनोकामनाएं ज़रूर पूरी करते हैं।

बता दें कि तिरुपति बालाजी मंदिर के चमत्कारों की कई कथाएं प्रचलित हैं जिन्हें जानकर लोग यहां दूर-दूर से आते हैं ताकि उनकी प्रार्थना भगवान सुन लें और उनका बेरा पार लगा दें।

आज वेद संसार आपको तिरुपति बालाजी से जुड़ी 10 सच बताने जा रहा है जो शायद आप नहीं जानते हैं –

• जान लें कि तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्यद्वार के दाएं और बालाजी के सिर पर अनंताळवारजी के द्वारा मारे गए निशान हैं। कहते हैं कि बालरूप में बालाजी को ठोड़ी से रक्त आया था, उसी समय से बालाजी के ठोड़ी पर चंदन लगाने की प्रथा शुरू हो गई थी।

• यही नहीं, भगवान तिरुपति बालाजी के सिर पर आज भी रेशमी बाल हैं और उनमें उलझने कभी नहीं आती है व साथ ही उनके बाल हमेशा ताजे लगते है।

• बता दें कि मंदिर से 23 किलोमीटर दूर एक गांव स्थित है जहां, बाहरी व्यक्ति का प्रवेश सख्त मना है। यहां मौजूद सभी लोग नियम से रहते हैं और यहां की महिलाएं ब्लाउज कभी नहीं पहनती हैं। उसी खास गांव से लाए गए फूल भगवान को चढ़ाए जाते हैं और साथ ही अन्य वस्तुएं जैसे कि – दूध, घी और  माखन आदि भी चढ़ाएं जाते हैं।

• दिलचस्प बात यह है कि भगवान बालाजी गर्भगृह के मध्य भाग में खड़े तो दिखाई देते हैं, मगर आपको वह दाई तरफ के कोने में खड़े हैं और बाहर से देखने पर ऐसा लगता है।

• भगवान बालाजी का रोजाना यहां श्रृंगार किया जाता है जहां, नीचे धोती और उपर साड़ी से सजाया जाता है।

• यहां गृभगृह में चढ़ाई गई किसी भी वस्तु को आप बाहर लेकर नहीं जा सकते हैं। ध्यान दें कि बालाजी के पीछे एक जलकुंड मौजूद है और उन्हें वहीं पीछे देखे बिना ही उनका विसर्जन किया जाता है।

• गौरतलब है कि बालाजी की पीठ को आप जितनी बार भी साफ करे लेकिन वहां गीलापन रहता ही है। यही नहीं, वहां पर कान लगाने पर समुद्र घोष सुनाई देता है।

• आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बालाजी के वक्षस्थल पर मां लक्ष्मी निवास करती हैं। हफ्ते के हर गुरुवार को निजरूप दर्शन के समय भगवान बालाजी की चंदन से सजावट की जाती है और फिर उस चंदन को निकालने पर मां लक्ष्मी की छवि उस पर उतर आती है और बाद में उसे बेचा जाता है।

• ध्यान रहें कि गर्भगृह मे जलने वाले चिराग कभी बुझते नहीं हैं और  वह कितने ही हजार सालों से जल रहे हैं यह बात किसी को पता भी नहीं है।

• बताते चलें कि सन् 1800 में तिरुपति बालाजी मंदिर परिसर को 12 साल के लिए बंद कर दिया गया था। कहते हैं कि किसी एक राजा ने 12 लोगों को मारकर दीवार पर लटका दिया था और ऐसी मान्यता है कि उसी समय विमान में भगवान वेंकटेश्वर प्रकट हुए थे।

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