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शनि की टेढ़ी नज़र से बचा सकते हैंं ये खास मंदिर

शनि की टेढ़ी नज़र से बचा सकते हैंं ये खास मंदिर

न्याय के देवता कहलाने वाले शनि देव के भयानक क्रोध से हम सभी बहुत अच्छी तरह वाकिफ हैं। हर व्यक्ति शनि देव के क्रोध से खुद को बचाने के लिए रात दिन बहुत प्रयत्न करता है ताकि उनकी टेढ़ी नज़र से वह बचें और एक खुशहाल जीवन जी सके। आपके मन में भी यह सवाल ज़रूर आता होगा कि भला शनि देव को खुश करें तो कैसे करें… यह जानकर हैरानी ज़रूर होगी लेकिन शनि देव को प्रसन्न करने के लिए एक खास दिन बनाया गया है जो वैशाख महीने में शनि अमावस्या के रूप में मनायी जाती है। यह शनिवार के दिन ही पड़ता है इसलिए इसे शनैश्चरी भी कहा जाता है।

ऐसी मान्यता है कि शनि अमावस्या के दिन दिल से की गई पूजा ज़रूर सफल होती है और आपको मनचाहा वरदान भी प्राप्त होगा। यह शनि देवता अगर किसी से खुश हो जाए फिर उस इंसान की किस्मत चमकने में देर नहीं लगती।

आज वेद संसार आपको शनि देव के एक ऐसे खास मंदिर के बारे में बताने जा रहा है जहां जाकर आप उनका आशीर्वाद आसानी से प्राप्त कर सकते हैं –

यूं तो हमारे देश में कई शनि मंदिर हैं… लेकिन वह तीन ही मंदिर ऐसे हैं जो काफी प्राचिन है और उसे चमत्कारिक पीठ भी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन तीन पीठों पर जाकर ही आप अफने पापों की माफी मांग सकते हैं। वहीं, जनश्रुति के अनुसार लोग इन स्थान पर जाकर ही शनि के दंड से बच सकते हैं।

यह तीनों पीठों में से एक है शिंगणापुर गांव में स्थित शनि शिगणापुर मंदिर जो शनि देव की बहुत ही प्राख्यात मंदिर मानी जाती है।

दूसरा मंदिर मध्यप्रदेश के ग्वालियर के पास स्थित शनिश्चरा मंदिर के नाम सो लोगों के बीच काफी प्रचलित है।

और तीसरा उत्तर प्रदेश के कोशी से 6 किलोमीटर दूर कौकिला वन में सिद्ध शनिदेव मंदिर  है।

जान लें कि अगर आपके जीवन में कोई भी परेशानी या फिर किसी भी तरह की कठिनाई है या यूं कहे कि शनि देव का प्रकोप है, तो आप इन जगहों पर आ सकते हैं। यही नहीं, इन स्थानों पर आए लोगों को तत्काल लाभ मिलता है। लोगों की मानें तो यह तीनों पीठ आज भी ज्यों के त्यों हैं और आज भी यहां चमत्कार होते हैं। इनमें से शनिश्चरा मंदिर का अपना खास ही महत्व देखने को मिलता है।

कैसे पहुंच सकते हैं शनिश्चरा मंदिर –

ग्वालियर से आप बस और टैक्सी से भी शनिश्चरा मंदिर जा सकते हैं। इसके अलावा शनिश्चरा रेलवे स्टेशन भी है, जो ग्वालियर-भिंड रेलवे लाइन पर ही पड़ता है। वहीं, कुछ शहरों से ग्वालियर के लिए सीधी हवाई सेवा भी है – राजमाता विजयाराजे सिंधिया हवाई अड्डे से शनिश्चरा मंदिर सिर्फ 15 किलोमीटर ही दूर है।

शनि अमावस्या एक महान दिन माना जाता है, जिसे त्योहार की तरह मनाया जाता है इसलिए इस खास दिन के लिए स्पेशल ट्रेन और बसें मंदिर तक के लिए चलाई जाती हैं।

शनि जयंती पर लगता है मेला –

हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को शनि जयंती का पर्व मनाया जाता है और शनि शनिश्चरा मंदिर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

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