धार्मिक स्थल

शालिग्राम पिंडी क्या है और कहां स्थित है

शालिग्राम पिंडी क्या है और कहां स्थित है

क्या आप एक ऐसे मंदिर के बारे में जानते हैं जहां शालिग्राम पिंडी का बड़ा ही दिलचस्प रहस्य छुपा हुआ है। आपको जानकर हैरानी होगी कि शालिग्राम एक प्रकार का जीवाश्म पत्थर होता है, जिसका प्रयोग परमेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में भगवान का आह्वान करने के लिए किया जाता है।

यूं तो शालीग्राम आमतौर पर पवित्र नदी की किनारों से एकत्र किया जाता है। यही नहीं, शिव भक्त पूजा करने के लिए शिवलिंग के रूप में लगभग गोल या अंडाकार शालिग्राम का ही उपयोग करते हैं। बता दें कि यह शंख की तरह चमकीले होते हैं और इस शालिग्राम को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वैष्णव इनकी पूजा ज़रूर करते हैं। लोगों की मानें तो एक पूर्ण शालिग्राम में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति अंकित होती है।

शालिग्राम पिंडी कहां है

बिहार में एक मंदिर स्थित है, जिसमें शालिग्राम पिंडी स्थापित है। कहते हैं कि लगभग 200 साल पहले नेपाल नरेश जंग बहादुर ने इसे भेंट किया था।

शालिग्राम पिंडी की विशेषताएं

शालिग्राम पिंडी की विशेषताएं

शालिग्राम पिंडी का आकार सबसे पहले मटर के दाने से कुछ बड़ा था, जिसे लाकर यहां बावली किनारे मंदिर के गर्भगृह में रख दिया गया था। आज पिंडी का आकार नारियल से दो गुना बड़ा हो गया है और अभी भी इसका आकार लगातार बढ़ते जा रहा है। बता दें कि यहां के लोग इसे ज़िंदा शालिग्राम मानते हैं। वहीं, वैज्ञानिकों ने भी पिंडी के आकार बढ़ने को लेकर स्टडी की, पर आकार बढ़ने के पीछे का दिलचस्प रहस्य का राज़ आज तक कोई नहीं पता कर पाया है।

बावली के किनारे हैं शालिग्राम मंदिर

वहीं, मंदिर के किनारों पर एक बावली है और मंदिर की ख्याति के चलते बिड़ला समूह इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर विकास करना चाहता था लेकिन तब मंदिर बनाने वाले हलवाइयों के परिजनों ने बिड़ला के प्रस्ताव का विरोध कर दिया। यही नहीं, बावली के किनारों पर और भी मंदिर मौजूद हैं। गैरतलब है कि मंदिर काफी पुरानी हो चुकी हैं और इसलिए शालिग्राम की पिंडी के दर्शन के लिए श्रद्धालु जन दूर दूर से यहां आते हैं।

शालिग्राम क्या होता है

शालिग्राम क्या होता है

शालिग्राम जो है वह दुर्लभ किस्म के चिकने और आकार में बहुत छोटे पत्थर होते हैं। यह शंख की तरह चमकीले होते हैं। बता दें कि शालिग्राम को भगवान विष्णु का रूप भी माना गया है और वैष्णव इनकी पूजा करते हैं। यह रंग में भूरे, सफ़ेद या फिर नीले रंग के हो सकते हैं। हालांकि आमतौर पर शालिग्राम नेपाल के काली गंडकी नदी के तट पर ही पाए जाते हैं। कहते हैं कि एक पूर्ण शालिग्राम में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति अंकित होती है।

Leave a Comment