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क्या है 9 देवी की दिव्य ज्योति की दास्तां

क्या है देवी की दिव्य ज्योति की दास्तां

भारत में यूं तो देवी के कई ऐसे शक्तिपीठ हैं, जिनके चमत्कार के आगे विज्ञान भी नतमस्तक है। माता का एक ऐसा ही चमत्कारी पावन धाम मंदिर हिमाचल प्रदेश में है। करोड़ों हिंदुओं की आस्था के इस केंद्र मेें सालों—साल से देवी की दिव्य ज्योत बगैर किसी दिए, बाती या फिर तेल के जल रही है। माता के इस चमत्कारी शक्तिपीठ का नाम है ज्वाला देवी मंदिर

बता दें कि देश के तमाम सिद्धपीठ और शक्तिपीठ के मुकाबले माता का यह मंदिर काफी अनोखा है, क्योंकि यहां पर देवी की किसी पिंडी या मूर्ति का पूजन नहीं बल्कि उनकी दिव्य ज्योति की पूजा की जाती है। वहीं, 51 शक्तिपीठ में से एक ज्वाला देवी मंदिर में पृथ्वी के गर्भ से नौ ज्वालाएं देवी दुर्गा के 9 स्वरूप में मौजूद हैं, जिनके दर्शन एवं पूजन के लिए लोग बड़ी संख्या में बहुत दूर से आते हैं।

आइए बताते हैं 9 देवी की दिव्य ज्योति की दास्तां –

• ज्वाला देवी मंदिर में से निकलने वाली पहली ज्योत महाकाली को समर्पित मानी गई है। महाकाली को लेकर ऐसी मान्यता है कि यह ज्योत भक्तों को उनके कष्ट से मुक्ति दिलाती है।

• वहीं, मंदिर में मौजूद दूसरी दिव्य ज्योत मां अन्नपूर्णा को समर्पित मानी गई है। ऐसी मान्यता है कि यदि किसी भक्त पर माता की कृपा हो जाए तो व्यक्ति के घर में कभी अन्न की कमी नही होती है। यही नहीं, व्यक्ति जिस भी जगह रहता है, वहां कभी अकाल नही पड़ता है।

• बात अगर माता की तीसरी दिव्य ज्योत की करें, तो यह मां चण्डी देवी को समर्पित है। मान्यता है कि माता के नाम का स्मरण करने मात्र से ही इंसान के सभी शत्रुओं का नाश हो जाता है।

• मंदिर में मौजूद चौथी दिव्य ज्योत मां हिंगलाज को समर्पित होती है। भक्तों की मानें तो माता के दर्शन मात्र से उनके सभी संकट दूर हो जाते हैं। माता हिंगलाज को शास्त्रों में भाग्य की रानी भी कहा गया है। कहते हैं कि हिंगलाज माता की इस दिव्य ज्योत का दर्शन करने वाले भक्त से भाग्य कभी नही रूठता है।

• दूसरी ओर गुफा में जल रही पांचवी ज्योत जो है वह मां विंध्यवासिनी को समर्पित मानी जाती है। इस ज्योत को लेकर भक्तों के बीच मान्यता है कि माता को जो सच्चे दिल से याद करता है, मां उसके सारे पापों को हर लेती है।

• मंदिर की छठी दिव्य ज्योत महालक्ष्मी को खास रूप से समर्पित है। मां लक्ष्मी को लेकर शास्त्रों में मान्यता है कि जो भक्त सच्चे दिल से मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, उनका घर सुख-संपदा आदि से हमेशा भरा रहता है।

• यही नहीं, गुफा की सातवीं ज्योत माता सरस्वती को सर्पित है। मां सरस्वती को संगीत, कला एवं ज्ञान की देवी माना जाता है। मां शारदा यानी सरस्वती की पूजा करने पर ही कालिदास को दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ था।

• गुफा की आठवीं ज्योत माता अंबिका को समर्पित है। लोगों में मान्यता है कि इस ज्योत की पूजा-अर्चना करने से मनुष्य के जीवन में सभी कष्ट आसानी से दूर हो जाते हैं।

• बताते चलें कि गुफा की नौवीं और आखिरी ज्योत माता अंजनी देवी को समर्पित है। शास्त्रों में मान्यता यह है कि इन्होंने ही महाबली हनुमान को जन्म दिया था।

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