धार्मिक स्थल

हनुमान जी के वह 5 मंदि‍र जहां पूरी होती है मन की मुराद

भगवान हनुमान एक ऐसे भगवान है, जिन्हें इस कलयुग में भी जीवित देवता माना गया है और उनकी पूरे सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामना भी तुरंत पूरी होती है। हमारे हिन्दू धर्म में भगवान श्री राम भक्त हनुमान जी के पूजन को काफी महत्व दिया जाता है और इनकी पूजा करने का सबसे शुभ दिन मंगलवार ही माना गया है।

बता दें कि देशभर में भगवान हनुमान के कई नामी व प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन हनुमान के ऐसे कुछ खास मंदि‍र भी हैं, जहां पर भक्तों की भारी संख्या देखने को मिलती है। आज वेद संसार आपको बताने जा रहा है हनुमान जी के खास 5 मंदिरों के बारे में जहां भगवान श्रीराम का नाम लेकर कोई भी मुराद मांगी जाए, तो वह अवश्य पूरी हो जाती है।

हनुमान गढ़ी, अयोध्या

आपने अयोध्या का नाम तो सुना ही होगा… जान लें कि हनुमान गढ़ी मंदिर के राजा कहलाते हैं भगवान हनुमान। मान्यताओं के अनुसार मंदिर में जब हनुमान जी की आरती होती है, तो उस समय वरदान मांगने वाले की हर इच्छा अवश्य से पूरी होती है।

यही नहीं, कहते हैं कि लंका विजय के बाद हनुमानजी पुष्पक विमान में भगवान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण जी के साथ यहां आए थे और तभी से वो हनुमानगढ़ी में विराजमान हो गए। जब भगवान राम परमधाम जाने लगे, तो उन्होंने अयोध्या का राज-काज हनुमान जी के हाथों ही सौंपा था।

पंचमुखी हनुमान, कानपुर

वहीं, कानपुर के पनकी में स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर की महिमा भी बड़ी निराली मानी जाती है। यही वह जगह है, जहां पर हनुमान जी और लवकुश का युद्ध हुआ था। युद्ध के बाद माता सीता ने हनुमान जी को लड्डु खिलाए थे और इसीलिए इस मंदिर में भी उन्हें लड्डुओं का ही भोग लगाया जाता है। यहां आने वाले भक्तों की सारी इच्छाएं सिर्फ लड्डू चढ़ाने से ही पूरी हो जाती हैं।

हनुमान मंदिर, झांसी

बात अगर झांसी के हनुमान मंदिर की करें, तो आश्चर्यजनक बात यह है यहां रोज सुबह पानी ही पानी बिखरा हुआ रहता है और कोई नहीं यह बात जानता है कि यह पानी आखीर आता कहां से है। बता दें कि यहां हनुमान जी की पूजा-पाठ इसी खास पानी के पानी के बीच ही पूरी होती हैं। लोगों की मानें तो इस मंदिर का पानी औषधीय गुणों से भरपूर है और इस पानी से चर्म रोग भी दूर होता है।

बंधवा हनुमान मंदिर, विन्ध्याचल

विन्ध्याचल पर्वत के पास मौजूद है, हनुमान जी की एक और अनोखी मंदिर जहां पर विराजते हैं बंधवा हनुमान। यहां पर ज्यादातर लोग शनिदेव के प्रकोप से बचने के लिए पूजा-पाठ करने दूर-दूर से आते हैं। जान लें कि यहां पर शनिवार को लड्डू, तुलसी और फूल चढ़ाने से साढ़ेसाती का प्रभाव भी कम हो जाता है।

मूर्छित हनुमान मंदिर, इलाहाबाद

दरअसल, एक बार की बात है जब हनुमान जी संगम किनारे भारद्वाज ऋषि से आशीर्वाद लेने आए थे, लेकिन वह इतने कमजोर हो गए थे कि उन्होंने प्राण त्यागने का निर्णय ले लिया था और तभी मां सीता आईं और फिर उन्होंने सिंदूर का लेप लगाकर उन्हें नया जीवन दान दिया था। बस इसी मान्यता के अनुसार यहां पर जो कोई भी भक्त हनुमान जी को लाल सिंदूर का लेप करता हैं, उसकी सारी कामनाएं पूरी हो जाती हैं।

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