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भगवान गणेश क्यों कहलाते हैं एकदंत, जानें कहां टूटा था गणपति जी का दांत!

भगवान गणेश क्यों कहलाते हैं एकदंत, जानें कहां टूटा था गणपति जी का दांत

हर देवता में जिसकी पहली पूजा होती… जिनकी पूजा के बिना कोई पूजा पूरी नहीं मानी जाती… हर खुशी की शुरुआत जिनसे होती है… वह कोई और नहीं बल्कि गणपति बप्पा मोरिया यानी कि भगवान गणेश है। यूं तो भगवान गणेश की मंदिर देश व विदेश दोनों ही जगह है और सभी लोग भगवान गणेश की पूजा सच्चे दिल से करते है और भगवान अपने भक्तों की हर मनोकानाओं को पूरा भी करते हैं।

बात जब भगवान गणेश की हो रही है, तो चलिए आज वेद संसार आपको बता ही दें गणपति बप्पा की सबसे खास मंदिर जो प्रकृति की गोद में बसा हुआ है।

भगवान गणेश की खास मंदिर है कहां

भगवान गणेश की यह खास और अनोखी मंदिर है छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा जिले से लगभग 30 किमी. की दूरी पर स्थित ढोलकल नामक स्थान पर भगवान गणेश की एक प्रतिमा मौजूद है। बता दें कि सैकड़ों वर्ष पुरानी भगवान गणपति की यह प्रतिमा ढोलकल की पहाड़ियों पर 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और वाकई इतनी ऊंचाई पर स्थापित यह प्रतिमा आश्चर्य का विषय बना हुआ है और यहां पर पहुंचना बहुत ही मुश्किल है।

गणेश जी की मंदिर की खास बातें यहां जानें

ऐसी मान्यतता है कि 10वीं शताब्दी में नागवंशियों ने गणेश जी की यह प्रतिमा दंतेवाड़ा स्थान की रक्षा के लिए ही स्थापित किया था। यहां मौजूद प्रतिमा ग्रेनाइट पत्थर से बना हुआ है, जो लगभग 6 फीट और चौड़ाई 21 फीट है। वहीं, वास्तुकला की दृष्टि से भी यह बहुत सुंदर है। इस खास प्रतिमा के ऊपर के दाहिने हाथ में जहां फरसा है तो वहीं, बाएं हाथ में भगवान गणेश का टूटा हुआ एक दांत है।

वहीं, भगवान गणेश के नीचे वाले यानी कि दाहिने हाथ में अभय मुद्रा में अक्षमाला एवं बाएं में मोदक है। दंतेश के इलाके को ही दंतोवाड़ा कहते हैं।

भगवान गणेश का नाम एकदंत कैसे पड़ा

दरअसल, दंतेवाड़ा में एक कैलाश गुफा स्थित है और इसी गुफा में भगवान गणेश और परशुराम के बीच में युद्ध हुआ था। इस युद्ध के दौरान ही भगवान गणेश का एक दांत टूट गया था जिस कारण उनका नाम एकदंत पड़ गया। बता दें कि दंतेवाड़ा से ढोलकल की ओर जाते समय रास्ते में एक गांव परस पाल की प्राप्ति होती है जिसे परशुराम के नाम से लोग जानते हैं।

लोगों की मानें तो नागवंशी शासकों ने ऊंचे पर्वतों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की थी। जान लें कि भगवान गणेश के पेट पर एक नाग का निशान है और जिसके बारे में लोग यह कहते हैं यह खास चिन्ह नागवंशियों द्वारा बनवाया गया था। देखा जाए तो कला की दृष्टि से यह खास प्रतिमा 10 या फिर 11वीं शाताब्दी की मानी जाती है।

तो दोस्तों अगर आपको मौका मिले तो ज़रूर भगवान गणेश की इस मंदिर को देखने जाए और वहां पूजा करें। ऐसे खास मंदिर का दर्शन कर आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाएंगी और आप एक खुशहाल ज़िंदगी जीना शुरु कर देंगे।

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