धर्म ज्ञान

सिर को ढकने के पीछे क्या है कारण

क्या आप भी अपने गंजेपन और डैंड्रफ को लेकर परेशान रहते हैं??? अकसर लोग इन तकलिफों को बहुत आम समझते हैं और इनके होने के पीछे बहुत से कारण को बताते हैं, जो हो सकता है कहीं-ना-कहीं सही भी हो, लेकिन आज वेद संसार आपको गंजेपन और डैंड्रफ के पीछे एक अनोखा कारण बताने जा रहा है…

आपने कभी यह गौर किया है कि जब हम कोई भी धार्मिक स्थल पर जाते हैं, तो अपने सिर पर दुपट्टा या फिर कोई भी कपड़ा ज़रूर रखते हैं और तभी दर्शन करते हैं। बता दें कि सिर पर दुपट्टा या आंचल रखकर भगवान की पूजा व दर्शन करने की परंपरा कई सालों से चली आ रही है। वहीं, किसी देवी-देवता की पूजा हो या कोई यज्ञ, हवन, पूजा, शुभ कार्यों में महिलाएं जहां आंचल से अपना सिर ढक लेती हैं तो वहीं पुरूष रूमाल या किसी कपड़े से अपना सिर ज़रूर से ढकते हैं।

आज भी बहुत से घरों में स्त्रियां अपने बड़े-बूढ़े, बुजुर्ग, सास-ससुर से जब आशीर्वाद लेती हैं, तो वह अपने सिर को साड़ी के पल्लू या फिर चुन्नी से ढक कर ही लेती हैं, क्योंकि यह उनके सम्मान का सूचक माना जाता है। यही नहीं अपने से बड़ों को आदर देने के लिए भी सिर को ढक कर रखा जाता हैं और कई जगह पर तो स्त्रियां नियमित रूप से ही अपना सिर को ढक कर रखा करती हैं।

सिर को ढकने के पीछे क्या है कारण

दरअसल, ब्रह्मारंध्र जो है वह हमारी शरीर की सूक्ष्म ऊर्जाओं को ग्रहण करता है और उसी ऊर्जा को दोबारा ऊपर की ओर ले जाता है। वहीं, बात अगर ब्रह्मांड की करें, तो अनगिनत ऊर्जा प्रति क्षण भ्रमण करती रहती है। जब आप ध्यान अथवा उपासना करते हैं, तो शरीर एक स्थान पर स्थिर यानि कि अचल हो जाता है और उस स्थिर अवस्था के दौरान ब्रह्मांड में मौजूद बहुत सारी ऊर्जा हमारे शरीर में सिर के ज़रिए ही प्रवेश कर जाती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ब्रह्मांड की ऊर्जा काफी तेज़ और शक्तिशाली मानी जाती है और इन्हीं ऊर्जाओं से पृथ्वी के सभी तत्व काम कर रहे हैं। जिस तरग किसी कुंभ घड़े में अधिक ऊंचाई से पानी अगर हम डालते हैं, तो वह कुंभ टूटकर बिखर सा जाता है ठीक उसी प्रकार उपासना, ध्यान और पूजा के समय शरीर कुंभ का रूप धारण कर लेती है। सोचिए ज़रा कि जब कुंभ रूपी शरीर में शक्तिशाली ऊर्जा आपके सिर के ऊपर से या फिर ऊंचाई से गिरेगी तब सिर पर भयंकर प्रहार होने का संकेत हो जाता है जिससे हमारी शरीर में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

सिर को ढकना कैसे करता है छन्नी का काम

देखा जाए तो हमारे ब्रह्मांड में पवित्र ऊर्जाओं (Positive Energy) के साथ-साथ अशुद्ध ऊर्जाओं (Negative Energy) का भी साम्राज्य होता है। यह अशुद्ध ऊर्जा शरीर में प्रवेश ना करे इसलिए भी सिर पर सूती वस्त्र या फिर कपड़े से ढंका जाता हैं। सही मायने में यह एख छतरी की तरह काम करता है जिसिर पर वस्त्र रखने से अशुद्ध ऊर्जा उस वस्त्र में अटक जाती हैं और शुद्ध ऊर्जा शरीर में प्रवेश कर जाती है।

ध्यान, उपासना के समय ब्रह्मारंध्र के माध्यम से भी हमारे शरीर में ऊर्जा पैदा होने लग जाती है। ऊर्जाओं का प्रभाव शक्तिशाली तो होता ही है जिसके प्रभाव से आपको सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी आदि जैसी समस्याएं आए दिन परेशान करने लग जाते है। वहीं, इन्हीं अशुद्ध ऊर्जाओं के प्रभाव को रोकने के लिए सिर पर कपड़ा अथवा शिखा रखी जाती है। सिर पर कपड़ा ढकने का अन्य कारण मन का इधर-उधर न भटकना भी है।

सिर पर वस्त्र आंखें भटकने से बचाती, जानें कैसे –

सिर पर वस्त्र आंखें भटकने से बचाती, जानें कैसे -

पूजा के समय हम ज़रूर अपने सिर पर कोई कपड़ा या आंचल रखते हैं और ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसा करने से आपकी आंखें इधर-उधर नहीं भटकतीं हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिर के बालों में एक चुम्बकीय शक्ति मौजूद होती है, जो ब्रह्मांड में चलित सकारात्मक और नकारात्मक शक्तियों को आसानी से ग्रहण कर सकती है। स्त्रियां अपने सिर पर वस्त्र ढक कर रखा करती हैं जिसके कारण उनके सिर में नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) ज्यादा प्रवेश नहीं कर पाती हैं।

पुरुषों के गंजेपन व डैंड्रफ का यह है राज़

अब तक हमने महिलाओं के बारे में ही ज़िक्र किया, आइए अब पुरुषों के बारें में बातें करते हैं… आपने नोटिस किया होगा कि पुरुषों में गंजेपन व डैंड्रफ की समस्या ज्यादा होती है। कहते हैं कि पुरुष का सिर खुला हुआ होता है जिससे नकारात्मक ऊर्जा उनके शरीर में प्रवेश करती रहती है और इससे बालों के रोग गंजापन, डैंड्रफ, बाल झडऩा आदि पुरुषों में अधिक देखने को मिलते हैं। आपने खुद भी इसका प्रभाव देखा ही होगा कि पुरुष के सिर के बाल उड़ने लग जाते हैं, वह गंजे होने लगते हैं जबकि उनके सिर के पीछे के हिस्से में कुछ बाल होते हैं क्योंकि नकरात्मक ऊर्जा उनके सिर के बीच भाग से होते हुए वह शरीर में प्रवेश कर जाते हैं इसलिए सिर के ठीक ऊपर के बाल टूट जाते हैं और धीरे-धीरे वह गंजे होने लग जाते हैं।

मुंडन कराने के पीछे का राज़

मुंडन कराने के पीछे का राज़

आपने अगर गौर किया होगा तो याद होगा जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार के सदस्यों का मुंडन किया जाता है और यह इसलिए किया जाता है ताकि मृत व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा परिवार के सदस्यों के बालों के अंदर ना प्रवेश कर पाएं। यूं तो स्त्रियां अपने सिर को ढक कर ही रखा करती हैं, इसलिए वह इस नकारात्मक कीटाणु से बच जाती हैं। यही नहीं, नवजात बच्चे का भी मुंडन कराया जाता है ताकि गर्भ के दौरान उसके बालों में चिपके हुए सारे अशुद्ध कीटाणु समाप्त हो जाएं।

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