धर्म ज्ञान

यह 4 रंग पूजा-पाठ में क्यों माने जाते हैं शुभ!

4 रंग पूजा-पाठ में क्यों माने जाते हैं शुभ

देखा जाए तो रंगो का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। जहां कुछ रंग आपके जीवन में उत्तेजना लाते हैं, तो वहीं, कुछ से शांति का भी अनुभव ज़रूर होता है।

बात अगर ज्योतिष शास्त्रों की करें तो रंगों का धार्मिक महत्व भी काफी है। यूं तो रंग अनेक हैं पर चार रंग ऐसे हैं, जिनका पूजा-पाठ में खासकर के महत्व माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इन 4 रंगो का उपयोग करने भर से ही आपको अपनी सारी परेशानियों से मुक्ति जल्द से जल्द मिल सकती है

आज वेद संसार आपको बताने जा रहा है उन्हीं 4 खास रंगों के बारे में –

• पीला रंग –

सनातन धर्म के बारे में आपने कभी ना कभी ज़रूर सुना होगा… इस सनातन धर्म के अनुसार पीला रंग बहुत खास होता है, क्योंकि यह रंग बृहस्पति देव का प्रिय रंग जो होता है। बता दें कि पीले रंग को भगवान विष्णु और सौन्दर्य का भी प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस रंग का उपयोग पूजा में बहुत ही शुभ माना जाता है। साथ ही गुरु को भाग्य का कारक माना जाता है और इस कारण मांगलिक कार्यों में भी पीले रंग का उपयोग ज़रूर किया जाता है। कहते हैं कि जिसका गुरु कमजोर होता है, उसे गुरुवार के दिन ज़रूर पीले वस्त्र पहनने चाहिए और पीली वस्तुओं का ही सेवन करना चाहिए। ऐसा करने से आपका गुरु बलशाली होता है और अगर आपकी शादी में कोई भी अड़चने आ रही हो तो वह झट से दूर हो जाती हैं। ध्यान रहे कि आप गलती से भी शयनकक्ष में पीले रंग का उपयोग ना करें, क्योंकि यह अशुभ फल देगा आपको।

• लाल –

अब बात एक ऐसे रंग की जिसका सीधा तात्पर्य देवी से माना जाता है। जी हां… हम बात कर रहे हैं लाल रंग की। इस रंग को सौभाग्य-समृद्धि और नए जीवन का प्रतीक माना जाता है और इसलिए किसी भी शुभ कार्य में लाल रंग का उपयोग ज़रूर किया जाता है। आपने देखा होगा कि जब किसी की शादी होती है, तो नई दुल्हन को लाल रंग की साड़ी ही पहनाई जाती है। वहीं, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा भी लाल वस्त्र धारण ही करती हैं, इसलिए तो मंदिरों में माता रानी को लाल रंग की चुनर चढ़ाने का रिवाज़ है। बता दें कि लाल रंग के उपयोग से आपके सौभाग्य में भी वृद्धि होती है, लेकिन इस बात का ध्यान ज़रूर रखें कि घर में इसका उपयोग ध्यान से करना चाहिए, क्योंकि लाल रंग उत्साह के साथ साथ उग्रता का भी प्रतिनिधित्व करता है। यही कारण है कि आपके घर की दीवारें, पर्दे, मैट आदि चटक लाल रंग के नहीं होने चाहिए।

• हरा –

हरा रंग हरियाली और खुशियों को दर्शाता है और इसलिए इस रंग को बहुत शुभ माना जाता है। हरा रंग सौभाग्य का भी प्रतीक माना जाता है। वहीं, माता रानी को श्रृंगार में मेहंदी और हरी चूड़ियां अर्पित करने का रिवाज़ है। और तो और पूजा में हरे आम के पत्ते, पान के पत्ते व केले के पत्तों का प्रयोग किया जाता है। मां लक्ष्मी का भी प्रिय रंग हरा ही माना जाता है और इसलिए इसके प्रयोग से धन-धान्य की कमी नहीं होती है। बताते चलें कि हरा रंग बुध ग्रह का भी प्रतीक माना जाता है।

• सफेद –

अब बात ऐसे रंग कि जो शांति का प्रतिक माना जाता है। सफेद रंग तो मां सरस्वती का बहुत प्रिय रंग है। इसलिए मां सरस्वती हमेशा सफेद वस्त्र ही धारण करती हैं। मां सरस्वती के उपवास के दिन सफेद वस्त्र धारण करने से ही मां के आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। वहीं, पुरातनकाल में यज्ञ आदि में भी सफेद रंग का उपयोग किया जाता था। इस खास सफेद रंग को शांति के साथ साथ पवित्रता का भी प्रतीक माना जाता है। जान लें कि सफेद रंग राहु को शांत करता है।

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