धर्म ज्ञान

कैसे और कितनी बार करें परिक्रमा?

कैसे और कितनी बार करें परिक्रमा

आपने बहुत से लोगों को मंदिरों में व गुरुद्वारा में भी गोल-गोल चक्कर लगाते हुए ज़रूर देखा होगा। यही नहीं, कुछ लोग तो पूजा की थाली या धूप बत्ती लिए पेड़ के भी गोल-गोल चक्कर लगाने लग जाते हैं… क्या उनको देखकर कभी आपके मन में यह सवाल नहीं आता है कि आखिर यह गोल-गोल का चक्कर लगाने के पीछे क्या कारण हो सकता है?

बता दें कि चक्कर की भी कोई गिनती नहीं है… कोई एक चक्कर, कोई दो तो कोई सात चक्कर लगाता हुआ नज़र आता है। जैसा कि हमने पहले भी बताया कि सिर्फ मंदिरों में ही नहीं बल्कि गुरुद्वारों में भी लोग पाठ करने के बाद चक्कर लगाते हैं।

यही नहीं, लोग सुबह-सुबह सूर्य पूजा के दौरान भी गोल-गोल घूमते हैं। जहां तक बात श्रृद्धालुओं की करें, तो उनके अनुसार ऐसा करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं लेकिन इसके पीछे कई और कारण भी है, जिन्हें शायद आप नहीं जानते हैं।

आज वेद संसार आपको बताने जा रहा है परिक्रमा करने के पीछे छीपे राज़

कहते हैं कि मंदिर में दर्शन करने और पूजा करने के बाद परिक्रमा करने से आपकी सारी सकारात्मक ऊर्जाएं शरीर में प्रवेश करती है और आपके मन को शांति मिलती है। साथ ही यह भी मान्यता है कि नंगे पांव परिक्रमा करने से अधिक सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

परिक्रमा करने के पीछे क्या है धार्मिक मान्यता

वहीं, दूसरी ओर हमारे धार्मिक मान्यता के अनुसार जब भगवान गणेश और कार्तिक के बीच संसार का चक्कर लगाने की प्रतिस्पर्धा चल रही थी, तब गणेश जी ने अपनी चतुराई से पिता शिव और माता पार्वती के तीन चक्कर लगा लिए थे।

यह भी एक कारण माना जाता है कि संसार के सभी लोग पूजा के बाद संसार के निर्माता के चक्कर लगाया करते हैं। लोगों की मानें तो ऐसा करने से धन-समृद्धि होती हैं और जीवन में खुशियां भी हमेशा बनी रहती हैं।

परिक्रमा किस दिशा और कितनी बार करना चाहिए

परिक्रमा किस दिशा और कितनी बार करना चाहिए

दोस्तों, परिक्रमा करने के सही दिशा के विषय में यह बात सामने आई है कि लोगों को हमेशा परिक्रमा करते वक्त इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि भगवान आपके दाएं हाथ की तरफ ही हो यानि कि परिक्रमा घड़ी की सुई की दिशा में ही करनी चाहिए तभी आपको शुभ फल की प्राप्ति होगी।

अब सवाल यह खड़ा होता है कि दिशा तो हमने बता दिया लेकिन परिक्रमा कितनी बार करना सही होता है? दरअसल, परिक्रमा का मतलब यह नहीं कि जितनी बार मन किया उतनी बार कर लिए और फिर चलते बनें।

अगर आप सच्चे मन से भगवान की अराधना व पूजा करने मंदिर आए हैं या गुरुद्वारा ही गए हैं तो परिक्रमा के सही नियम भी आपको जानना बहुत आवश्यक है। अपनी मनचाही मुराद को अगर आप पूरा करना चाहते हैं तो याद से परिक्रमा 8 से 9 बार ही करें।

हम आशा करते हैं कि वेद संसार द्वारा बताए गए इस परिक्रमा को करने के नियम को आप अवश्य अपनाएंगे और खुशहाल ज़िंदगी को जीएंगे।

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