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रामायण से जुड़ी यह 5 बातें आपके जीवन को बना सकती है सुखी

जैसा कि हम सभी जानते हैं पूरे देश में इस समय लॉकडाउन हो रखा है… और लोग अपने-अपने घरों में रहकर ही दुनिया में फैले इस कोरोना वायरस को मात देने में जुटे हुए हैं। दूसरी ओर, सबसे पुराना और लोकप्रिय टीवी शो रामायण एक बार फिर दूरदर्शन पर प्रसारण किया जा रहा है और देखते ही देखते कुछ दिनों में ही इसकी टीआरपी ने रिकॉर्ड ब्रेक कर दिया है।

आज रामायण एकलौता ऐसा सीरियल है जिसे पूरे देश के लोग परिवार संग एक साथ बैठकर रामायण देख रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रामायण हिंदूओं का एक प्रमुख पवित्र ग्रंथ माना जाता है… जिसमें अनुशासन, मर्यादा, कर्तव्य और बुराईओं को कैसे परस्त किया जा सकता है, इन सब बातों को विस्तार से बताया गया है।

आपको जानकर हैरानी अवश्य होगी लेकिन सत्य यही है कि रामायण के हर एक प्रसंग में ऐसी बातें मौजूद हैं जिसे देखकर और उनसे सीखकर हम सभी को अपने जीवन में शामिल करना चाहिए। याद रहे कि रामायण की सीख से सभी तरह के तनाव और परेशानियों से आप हमेशा बच सकते हैं।

आज वेद संसार आपको बताने जा रहा है रामायण से जुड़े  कुछ खास जीवन मंत्र के बारे में –

• मर्यादा और अनुशासन

छोटी उम्र से ही हमें अनुशासन की पाठ अपने माता-पिता व शिक्षको से प्राप्त होती है। देखा जाए तो अनुशासन और मर्यादा किसी भी मनुष्य का सबसे अच्छा गुण भी माना जाता है। देखा जाए तो भगवान श्री राम का व्यक्तित्व मर्यादित और अनुशासन के गुणों से भरपूर रहा है। भगवान राम ने हमेशा अपनी मर्यादाओं और अनुशासन में रहकर ही जीवन की हर एक जिम्मेदारी को निभाया है। आपके लिए अच्छा यही होगा कि आप भगवान श्री राम के इन दो खास गुणों को अपने जीवन में उतारे और एक अच्छे इंसान बनकर सुखी जीवन को व्यतीत करें।

• दया और प्रेम का भाव

वहीं, दयावान बनना और सभी के साथ प्रेम भाव रखना भी रामायण से हम सभी सीख सकते हैं। कहा जाता है कि भगवान श्री राम ने एक साथ कई रिश्तों को दया और प्रेम के भाव में रखकर निभाया था और तो और उन्होंने पुत्र, भाई, पति और एक राजा की जिम्मेदारी भी प्रेम के भाव के साथ निभाई थी। कोई भी इंसान अगर भगवान श्री राम के इन्हीं दो गुणों को अपना लें तो यह सत्य है कि उसका जीवन खुशहाली से भरपूर हो जाएगा।

• विविधता में एकता

एकता में बल होता है… अकेले इंसान को जीत हासिल होने में मुश्किलें हो सकती है वहीं, दो-तीन लोग मिलकर अपनी एकता से किसी पर भी विजय प्राप्त कर सकते हैं। रामायण में विविधता में एकता कैसे होनी चाहिए… इसकी बड़ी सीख समाज को दी है। और तो और रावण को परास्त करने में भगवान राम की सेना में मनुष्य से लेकर छोटे से बड़े जानवरों समेत कई तरह के लोगों का साथ उनको मिला था। राम समेत चारों भाइयों का अलग-अलग चरित्र होने के बावजूद सभी में एकता देखने को मिलती थी। इस बात को गांठ बांध लें कि विविधता होने के बावजूद अगर एक साथ मिलकर आप किसी भी समस्या से लड़ते हैं, तो उस पर विजय जरूर प्राप्त कर सकते हैं।

• विश्वास

इस बात को आप झूठला नहीं सकते हैं कि  किसी भी रिश्ते की नींव विश्वास होती है और यही होती है सबसे बड़ी पूंजी भी। भगवान राम ने 14 साल का वनवास काटा था और कैकई को दिए वचन को पूरा निभाया था। इन सब के बाद भी भगवान राम का सभी भाइयों से बराबर सा प्रेम था। जहां राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने 14 साल तक राम के साथ वनवास में रहे तो, वहीं भरत ने अयोध्या के पूरे राज व पाठ को ही ठुकरा दिया था। क्या आपको नहीं लगता है कि यह सब विश्वास और रिश्तों की डोर को मजबूती के लिए हमें प्रेरित करते हैं।

• एक समान आचरण

बताते चलें कि भगवान श्री राम के व्यक्तित्व ने हम सभी को औरो के प्रति एक समान आचरण रखने की सीख दी है। भगवान श्री राम ने कभी भी भेदभाव के साथ किसी से भी आचरण नहीं किया था…  और तो और उन्होंने हर जाति, उम्र, लिंग और पद के साथ एक जैसा व्यवहार किया। ऐसे में हमे भगवान राम के समानता के गुण से सीखना चाहिए।

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