धर्म ग्रंथ रामायण

श्री राम नहीं बल्कि लक्ष्मण ने मारा था रावण को, वो कथा जो वाल्मीकि रामायण में है नहीं

यूं तो हिंदुस्तान में राम के कई रूप हैं, कई भाव हैं… जहां किसी के लिए राम वृत्ति हैं तो वहीं किसी के लिए प्रवृत्ति और किसी के लिए निवृत्ति… इसीलिए रामायण की दुनिया भर में 3000 से ज़्यादा वर्ज़न आपको देखने और पढ़ने को मिलेंगे, जिनमें सबसे मानक वाल्मीकि रामायण को ही माना जाता है
90 के दशक के टीवी सीरियल रामायण और पिछले 100 सालों में रामलीला के कई रूपों ने इन अलग-अलग रामायणों की खीचड़ी इस तरह पकायी है कि आज के समय में राम कथा में ऐसी बहुत सी चीज़ें कही जाती हैं जो वाल्मीकी रामायण में हैं ही नहीं। आज वेद संसार आपको बताने जा रहा है ऐसी ही राम कथा की वह बातें, जो वाल्मीकि रामायण में है ही नहीं –

लक्ष्मण रेखा

आपको जानकर हैरानी होगी कि लक्ष्मण रेखा का ज़िक्र वाल्मीकि रामायण में है ही नहीं…. तुलसी की मानस में भी इसका ज़िक्र कभी नहीं आता है, मंदोदरी बाद में एक जगह इशारा ज़रूर करती है, मगर कुछ खास तवज्जो नहीं दी गई है। दक्षिण की सबसे चर्चित कम्ब रामायण में भी रावण पूरी झोपड़ी को ही उठा ले जाता है।
बता दें कि बंगाल के काले जादू वाले दौर में कृतिवास रामायण में तंत्रमंत्र के प्रभाव में लक्ष्मण रेखा की बात ज़रूर हुई है। रामानंद सागर के सीरियल में भी इसका ज़िक्र किया गया और इसी के साथ आदर्श नारी की परिभाषा बताने वाले कथा वाचकों ने इसे खूब फैलाया और सीता हरण का एक कारण मिल गया।

शबरी के जूठे बेर

वहीं, वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस में राम शबरी के यहां जाकर बेर खाते हैं ना कि जूठे बेर खाते हैं… जाति के छुआछूत से भरे समाज में जब यह लिखा जा रहा था तो अपने समय का क्रांतिकारी कदम था। जूठे बेर की चर्चा सबसे पहले 18वीं सदी के भक्त कवि प्रियदास के काव्य में मिलती है। दरअसल, गोरखपुर की गीता प्रेस से निकलने वाली कल्याण के 1952 में छपे अंक से ये धारणा लोकप्रिय हुई और रामलीलाओं का हिस्सा बन गई।

हनुमान का सागर पार करना

वाल्मीकि रामायण में ज़िक्र आता है कि हनुमान ने सागर संतरण किया था यानी कि तैरकर पार किया था। मगर रामचरित मानस के सुंदर कांड में हनुमान समु्द्र लांघकर पार कर जाते हैं। बताते चलें कि तुलसी जिस नायकत्व को जनता में बिठाना चाहते थे, उसके लिए इस तरह का वर्णन ज़रूरी था।

अहिल्या का किरदार

वाल्मीकि रामायण के प्रथम सर्ग में अहिल्या के सामने इंद्र ऋषि का रूप बना कर आते हैं। अहिल्या समझ जाती हैं मगर रुकती नहीं हैं। वाल्मीकि रामायण में अहिल्या और इंद्र के संभोग में दोनों की इच्छा स्पष्ट दिखाई पड़ती है। दूसरी ओर कम्ब रामायण के पालकांतम (प्रथम सर्ग) के छंद 533 में अहिल्या को संभोग के बीच में इंद्र के होने का पता चलता है… मगर नशे में अहिल्या रुक नहीं पाती हैं। इन सबसे अलग तुलसी की मानस में अहिल्या सिर्फ इंद्र का वैभव देख कर एक पल को मोहित हो जाती हैं।

इंद्र उनके साथ पूरी तरह से छल करते हैं… मध्य युग में जब नायकत्व गढ़ा जा रहा था तो पति के रहते किसी और से संबंध बनाने वाली स्त्री का उत्थान करवाना शायद थोड़ा मुश्किल रहा होगा।

श्री राम नहीं, लक्ष्मण ने मारा था रावण को

क्या आप जानते हैं कि जैन परंपरा में देवात्मा कभी हिंसा नहीं कर सकता है, इसलिए पउमंचरिय (जैन रामायण) में राम रावण का वध नहीं करते बल्कि लक्ष्मण से करवाते हैं। लक्ष्मण भी लक्ष्मण नहीं, वासुदेव हैं जो रावण का उद्धार करते हैं और इसके बाद वह राम निर्वाण को प्राप्त हो जाते हैं और लक्ष्मण नर्क में जाते हैं। इस रामायण में सीता रावण की पुत्री हैं जिन्हें उसने छोड़ दिया था और वो ये बात नहीं जानता है।और, हां रावण भी शाकाहारी है।
तो दोस्तों ये थी राम कथा की वो बातें वाल्मीकि रामायण में नहीं है।

Leave a Comment