धर्म ग्रंथ रामायण

सीता स्वयंवर में तोड़ा गया धनुष कैसे था नियुक्लियर वेपन, जानें रहस्य!

सीता स्वयंवर में तोड़ा गया धनुष कैसे था नियुक्लियर वेपन, जानें रहस्य

मां सीता के पिता राजा जनक भगवान शिव के वंशज थे और भोलेनाथ का धनुष उनके राज महल में ही रखा हुआ था। महाराज जनक ने यह बात कही थी कि जो उस धनुष की प्रत्यंचा को चढ़ा देगा… उसी से मेरी पुत्री सीता का विवाह रचाया जाएगा।

शिव धनुष नहीं था कोई साधारण धनुष –

बता दें कि शिव धनुष कोई साधारण धनुष नहीं बल्कि उस काल का ब्रह्मास्त्र माना जाता था। वहीं, भगवान शंकर का परम भक्त रावण भी उसी खास धनुष को पाने के लिए माता सीता के स्वयंवर में आ पहुंचा था। रावण को इस बात पर पूरा भरोसा था कि शिव भक्त होने के कारण वह धनुष उसे ही प्राप्त होगा और साथ ही माता सीता भी उसी की हो जाएंगी।

चमत्कारिक शिव धनुष की गाथा

चमत्कारिक शिव धनुष की गाथा

ऐसी मान्यता है कि चमत्कारिक शिव धनुष के संचालन की विधि राजा जनक, माता सीता, आचार्य श्री परशुराम और आचार्य श्री विश्वामित्र को ही बस मालूम थी। जनक राजा को इस बात का डर सताने लग गया था कि अगर धनुष रावण के हाथ लग गया, तो इस सृष्टि का विनाश होना तय है।

ऐसे में विश्वमित्र ने पहले ही भगवान राम को उसके संचालन की विधि बता दी थी। जब श्री राम द्वारा वह धनुष टुट गया तभी परशुराम जी को बहुत गुस्सा आ गया था, लेकिन आचार्य विश्वामित्र एवं लक्ष्मण के समझाने के बाद कि – ‘वह एक पुरातन यन्त्र था इसलिए संचालित करते ही टूट गया…” तब जाकर श्री परशुराम का क्रोध शांत हुआ था। इसके अलावा परशुराम समझ गए थे कि राम ही भगवान विष्णु के अवतार हैं।

शिव जी का धनुष था एक नियुक्लियर वेपन

शिव जी का धनुष था एक नियुक्लियर वेपन

जैसा कि हमने पहले भी बताया कि वह धनुष साधारण नहीं था और वह शिवजी का धनुष और उस ज़माने का आधुनिक परिष्कृत नियुक्लियर वेपन भी माना जाता था। जब ऋषि-मुनियों को इस बात का पता चला कि चमत्कारी शिव धनुष पर रावण की बुरी दृष्टि हैं… तभी उन्होंने यह विचार कर लिया था कि इसको गलत हाथों में जाने से बचाना बहुत ज़रूरी है वरना भयंकर विनाश होने से कोई नहीं रोक पाएगा।

इसी कारण धनुष को नष्ट करने का आयोजन करने के लिए सही व्यक्ति चुनने का निर्णय ऋषि विश्वामित्र को दे दिया गया और तब सीता स्वयंवर का आयोजन किया गया और प्रभु श्रीराम जी द्वारा वह नष्ट किया गया।

Leave a Comment