रामायण

रामायण के वह 5 रहस्य जिससे दुनिया अभी भी है अनजान

हम सभी बचपन से ही रामायण की गाथ सुनते आए हैं और टीवी पर भी नाटक के रूप में दिखाया गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि रामायण के कुछ खास रहस्य भी हैं जिससे दुनिया अभी भी अनजान है।

रामायण क्या है –

बता दें कि भगवान श्री राम और देवी सीता के जन्म एवं जीवनयात्रा का वर्णन जिस महाकाव्य में किया गया है उसे रामायण के नाम से ही जाना जाता हैl ऐसी मान्यता है कि मूल रामायण की रचना “ऋषि वाल्मीकि” द्वारा किया गया था, लेकिन कई अन्य संतों और वेद पंडितों जैसे कि – तुलसीदास, संत एकनाथ आदि ने इसके अन्य संस्करणों की भी रचना की हैl हालांकि देखा जाए तो प्रत्येक संस्करण में अलग-अलग तरीके से कहानी का वर्णन किया गया है, लेकिन मूल रूपरेखा एक ही हैl जान लें कि रामायण की घटना 4वीं और 5वीं शताब्दी ई.पू. की हैl

आज वेद संसार आपको रामायण से जुड़े ऐसे 5 रहस्य बताने जा रहा है, जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे। यह सत्य है कि आज तक पूरी दुनिया इन 5 रहस्यों से अनजान है

रामायण के हर 1000 श्लोक के बाद आने वाले पहले अक्षर से बनता है गायत्री मंत्र

क्या आप जानते हैं कि गायत्री मंत्र में 24 अक्षर होते हैं और वाल्मीकि रामायण में 24,000 श्लोक हैंl रामायण के हर 1000 श्लोक के बाद आने वाले पहले अक्षर से ही गायत्री मंत्र बनता हैl बता दें कि यह मंत्र इस पवित्र महाकाव्य का सार है और गायत्री मंत्र को सर्वप्रथम ऋग्वेद में उल्लिखित भी किया गया हैl

राम और उनके भाइयों के ही नहीं, राजा दशरथ एक पुत्री के भी थे पिता

आपको जानकर हैरानी ज़रूर होगी लेकिन सत्य यही है कि भगवान श्री राम की एक बहन भी थीं, जिनका नाम “शांता” थाl वह आयु में चारों भाईयों से काफी बड़ी थींl उनकी माता कौशल्या थींl

राम विष्णु के अवतार हैं तो उनके अन्य भाई किसके अवतार थे

राम विष्णु के अवतार हैं तो उनके अन्य भाई किसके अवतार थे

जहां भगवान श्री राम को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है लेकिन क्या आपको पता है कि उनके अन्य भाई किसके अवतार थे??? लक्ष्मण को शेषनाग का अवतार माना जाता है जो क्षीरसागर में भगवान विष्णु का आसन हैl जबकि भरत और शत्रुघ्न को क्रमशः भगवान विष्णु द्वारा हाथों में धारण किए गए सुदर्शन-चक्र और शंख-शैल का अवतार माना गया हैl

सीता स्वयंवर में प्रयुक्त भगवान शिव के धनुष का नाम क्या

हममें से अधिकतर लोग यही बात जानते हैं कि श्री राम का सीता से विवाह एक स्वयंवर के माध्यम से हुआ थाl वहीं, उस स्वंयवर के लिए भगवान शिव के धनुष का इस्तेमाल किया गया था, जिस पर सभी राजकुमारों को अपना प्रत्यंचा चढ़ाना था, लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि भगवान शिव के उस धनुष का नाम “पिनाक” थाl

लक्ष्मण आखीर क्यों 14 वर्षों तक सोए नहीं थे

ऐसी मान्यता है कि वनवास के 14 वर्षों के दौरान अपने भाई और भाभी की रक्षा करने के उद्देश्य से लक्ष्मण कभी सोया नहीं करते थे और इसलिए उन्हें “गुदाकेश” के नाम से भी जाना जाता हैl दरअसल, वनवास की पहली रात को जब राम और सीता सो रहे थे, तो निद्रा देवी लक्ष्मण के सामने प्रकट हुईं बस उस समय लक्ष्मण ने निद्रा देवी से अनुरोध किया कि उन्हें ऐसा वरदान दें कि वनवास के 14 वर्षों के दौरान उन्हें नींद कभी आने ना पाए और वह अपने प्रिय भाई और भाभी की रक्षा कर सकेl

निद्रा देवी इस बात पर प्रसन्न होकर बोली कि अगर कोई तुम्हारे बदले 14 वर्षों तक सोए, तो तुम्हें यह वरदान प्राप्त हो सकता हैl फिर क्या इसके बाद लक्ष्मण की सलाह पर निद्रा देवी लक्ष्मण की पत्नी और सीता की बहन “उर्मिला” के पास जा पहुंचीl उर्मिला ने लक्ष्मण के बदले सोना स्वीकार कर लिया और वह पूरे 14 वर्षों तक सोती रहीl

Leave a Comment