महाभारत

महाभारत: शकुनि मामा के पासों का यह था सच!

महाभारत की कथा हम सबने कभी ना कभी अपने जीवन में ज़रूर से देखा है या फिर पढ़ा है। इस कहानी के सारे ही पात्र अपने आप में महत्वपूर्ण थे। एक ऐसा ही किरदार था शकुनि, जिसे महाभारत का युद्ध होने का जिम्मेदार माना जाता है।

शकुनि मामा कौन थे –

गांधारी के भाई और कौरवों के मामा थे शकुनि। वह अपने स्वभाव से ही बहुत खराब थे और आगे चलकर वह दुर्य़ोधन के मंत्री भी बन गए थे। शकुनि ने अपनी बदमाश बुद्धि का इस्तेमाल कर पांडवों को काफी कष्ट दिए। इनका अधिकतर जीवन अपने बहन के ससुराल में ही बीता था।

आज वेद संसार आपको बताने जा रहा है शकुनि मामा से जुड़ी यह एक खास बात –   

मामा शकुनि जुआ का खेल खेलने में बहुत ही माहिर थे। वह हमेशा अपने जीजा जी यानी कि धृतराष्ट्र के दरबार में रहते थे। एक बार की बात है, जब युधिष्ठिर और दुर्योधन के बीच जुआ का खेल खेला गया। वहीं, शकुनि ने दुर्योधन की ओर से जुआ का खेल खेला था। जैसा कि हमने पहले ही बताया है कि शकुनि एक बहुत ही माहिर जुआ खिलाड़ी था। उसने युधिष्ठिर को एक भी दांव जीतने नहीं दिया और उससे सब कुछ छिन भी लिया। युधिष्ठिर हारते चले जा रहे थे और शकुनि उन्हें उकसाना नहीं छोड़ रहे थे, ऐसे में युधिष्ठिर की भी मती मारी गई और क्रोध व घबराहट में उसने अपनी पत्नी द्रौपदी को ही दांव पर लगा दिया था। बता दें कि जुए के इसी खेल के बाद महाभारत का युद्ध संपन्न हुआ था, जिसमें कुरु वंश का विनाश हो गया था।

शकुनि यह बात भलिभांती जानता था कि अगर महाभारत का युद्ध हुआ, तो कौरवों की हार पक्की होगी, फिर भी वह यही चाहता था कि महाभारत का युद्ध जरूर हो।

शकुनि नहीं थे पहले बदमाश, जानें क्यों हो गए थे वह बदमाश 

पौराणिक कथाओं की मानें तो शकुनि का मन पहले बहुत साफ हुआ करता था और वह अपनी बहन गांधारी को भी बहुत प्यार करते थे। वह कभी नहीं चाहते थे कि उनकी बहन गांधारी की शादी एक नेत्रहीन इंसान से हो, लेकिन गांधारी ने अपने भाई की नहीं सुनी और भीम के कहने पर उसने धृतराष्ट्र से शादी कर ली।

शकुनि ने अपने पासों से कौन सा खेल खेलकर लिया था बदला –

बात वाकई में यह है कि धृतराष्ट और गांधारी के शादी के कुछ दिन बीत जाने के बाद ही एक राज़ का पता चला, जो गांधारी से जुड़ी हुई थी। दरअसल, गांधारी के पहले विवाह की बात जानकर धृतराष्ट्र इतने ज्यादा गुस्सा हो गए कि उन्होंने गांधारी के 100 भाईयों और पिता को बंदी बना लिया। यही नहीं, बंदी गृह में इन 100 भाईयों और उनके पिता को बहुत कम खाना दिया जाता था ताकि सभी भूखे रहे और एक दिन मृत्यु को प्राप्त हो जाए।

ऐसे में शकुनि के पिता ने विचार किया कि इतने कम खाने से सबका पेट नहीं भर पा रहा है, तो क्यों ना हम सभी एक को ही जो ज्यादा बुद्धिमान है उसे खाना खने दें ताकि वह जीवित रह पाए और हमारे इस कष्ट का बदला धृतराष्ट्र से ले सके। उन्होंने शकुनि को चुना क्योंकि उन्हें शकुनि का गुण भलिभांति पता था। शकुनि कभी उन सबका बदला लेना भूल ना जाएं इसलिए सभी ने मिलकर शकुनि का एक पैर तोड़ दिया ताकि वह गलती से भी अपने परिवार का अपमान भूल ना सकें। यही कारण था कि शकुनि हमेशा लंगड़ाकर चला करता था।

हड्डियों से बनें थे शकुनि मामा के पासे –

शकुनि के पिता को यह बात समझ में आ गई थी कि शकुनि को चौसर के खेल में बहुत रूचि है, तो इसलिए उन्होंने शकुनि को यह कहा कि उनके मरने के बाद उनकी हड्डियों से पासे बना लेना और फिर सदैव उस पासे को अपने संग रखना। यह पासे तुम्हारी बात मानेंगे औऱ तुम्हें कभी कोई जुए में हरा नहीं पाएगा।

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