धर्म ग्रंथ महाभारत

जब श्री कृष्ण ने सभी पत्नियों के लिए कही यह बात

हम सभी महाभारत के खूनखार युद्ध की दास्तां भलिभांति जानते हैं, लेकिन क्या आप यह बात जानते हैं कि द्रौपदी के कारण ही महाभारत का युद्ध हुआ था और ऐसा हम नहीं बल्कि भगवान श्री कृष्ण ने खुद कहा था।

दरअसल, महाभारत के युद्ध की शुरुआत में ही दुर्योधन कौरवों के सेनापति भीष्म पितामह को लेकर काफी व्यंग्य करने लगा। वहीं इस बात से दुखी होकर एक दिन पितामह ने यह घोषणा कर दी कि कल वह सभी पांडवों को मौत के मुंह सुला देंगे। उधर जब इस बात की जानकारी पांडवों को मिली तो वह गहरी चिंता में पड़ गए क्योंकि भीषेम पितामह को युद्ध में हराना असंभव था।

श्री कृष्ण ने निकाला उपाय 

श्री कृष्ण ने निकाला उपाय 

 

उस दिन सूर्यास्त के बाद द्रौपदी को श्री कृष्ण अपने साथ लेकर भीष्म पितामह के शिविर जा पहुंचे और द्रौपदी से कहा कि अंदर जाकर पितामह को प्रणाम करो। श्री कृष्ण की बातें भला द्रौपदी कैसे इंकार करती, उसने ठीक वैसा ही किया जैसा भगवान श्री कृष्ण ने उनसे करने को कहा। द्रौपदी के प्रणाम करने पर भीष्म ने अपनी कुलवधु को अखंड सौभाग्यवती भव: का आशीर्वाद दे दिया।

फिर भीष्म ने द्रौपदी से पूछा कि “आखिर तुम इतनी रात को अकेले कैसे आई? क्या तुम्हें श्री कृष्ण यहां लेकर आए हैं?”

द्रौपदी ने उत्तर दिया – “जी पितामह, मैं यहां श्री कृष्ण के साथ ही आई हूं और वह शिविर के बाहर खड़े हैं”

भीष्म यह बात जानकर तुरंत द्रौपदी के संग बाहर आए, श्री कृष्ण को प्रणाम किया और कहा कि – “मेरे एक वचन को दूसरे वचन से काट देने का काम और कोई नहीं बल्कि श्री कृष्ण ही कर सकते हैं।”

श्री कृष्ण ने द्रौपदी को दिया ज्ञान 

अपने शिविर की ओर लौटते समय श्री कृष्ण ने द्रौपदी से कहा कि अब सभी पांडवों को जीवनदान मिल गया है। ध्यान रहे कि बड़ों का आशीर्वाद एक कवच की तरह काम करता है और इसे कोई अस्त्र या शस्त्र कुछ बिगाड़ नहीं सकता। वहीं, अगर द्रौपदी तुम रोज भीष्म, धृतराष्ट्र, द्रौणाचार्य, कृपाचार्य आदि को प्रणाम करती तो आज युद्ध की स्थिति बनती ही नहीं।

श्री कृष्ण का सबक पत्नियों के लिए 

श्री कृष्ण का सबक पत्नियों के लिए 

भगवान श्री कृष्ण की सीख यही है कि पति के सुख के लिए पत्नी को अपने कुल के सभी बड़े लोगों का आदर व सत्कार ज़रूर करना चाहिए। जान लें कि बड़ों के आशीर्वाद से पति सभी दुखों से बचा रहता है। यह सत्य है कि अधिकतर घरों में इसी एक वजह से कलेश हुआ करता है क्योंकि पत्नी अपने पति के माता-पिता का सम्मान नहीं करती है। जो भी पत्नी भगवान श्री कृष्ण की इस बात को याद रखेगी उसके घर में शांति और खुशियां हमेशा विराजेगी।

दोस्तों यह जान लें कि ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए और एक खुशहाल जीवन जीने के लिए बड़ों के आशीर्वाद की आवश्यक्ता बहुत होती है। किसी ने सही कहा है कि “कुछ भी काम करें या ना करें लेकिन कोई दुआ या फिर आशीर्वाद कभी खाली नहीं जाता”।

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