धर्म ग्रंथ रामायण

रावण के मुंह से कब, कहां और क्यों निकला – ‘शत्रु हो तो राम जैसा’

यूं तो हमारे हिंदू धर्म में बहुत से ग्रंथ लोकप्रिय हैं और उन्हीं ग्रंथों में से एक ग्रंथ है रामायण, जिसे पढने या फिर सुनने के बाद मन को एक अलग ही सूकून व शांति मिलती है। वहीं, रामायण में मौजूद कई प्रसंगों से हमें सीख भी मिलती है। जीवन को खुशहाल और कामयाब बनाने के कई तरकीब छिपे हुए हैं रामायण ग्रंथ में।

आज वेद संसार आपको एक ऐसे ही प्रसंग की व्याख्या बताने जा रहा है, जो भगवान श्रीराम और रावण से जुड़ा हुआ है। यह वह चिलचस्प प्रसंग है, जिसमें रावण ने खुद राम के लिए कहा है कि “अगर दुश्मन हो तो राम जैसा”… तो चलिए जानते हैं इस प्रसंग से जुड़ी खास बातें –

कहते हैं कि एक बार, भगवान श्रीराम ने जामवंत को बलवान व शक्तिशाली रावण के पास एक खास निमंत्रण के साथ भेजा। वहीं, जामवंत जब रावण के दरबार में गए, तो उनका पूरे मान सम्मान के साथ भव्य स्वागत किया गया। यही नहीं, उस प्रसंग के अनुसार रावण ने जामवंत के स्वागत में उन्हें अपने सिंहासन पर भी बैठा दिया था। दरअसल, ऐसा कहा जाता है कि जामवंत ने रावण से कहा कि – “मैं प्रभु श्रीराम के कहने पर आपको आचार्य पद धारण करने का निमंत्रण लेकर आया हूं”। उधर जामवंस के मुख से यह सब सुनकर रावण काफी हैरान व परेशान हो गया। रावण के अलावा भी उस सभा में मौजूद बाकि लोग भी काफी हैरानी में पड़ गए।

ऐसे में रावण तुरंत जामवंत से प्रश्न करते हैं कि अगर मैं श्रीराम का यह खास निमंत्रण ठुकरा दूं तो, फिर इसका परिणाम क्या होगा??? रावण के इस सवाल पर जामवंत ने बस एख ही बात कही कि – “यह तो आपकी मर्जी है”।

जब रावण ने कहा – ‘शत्रु हो तो राम जैसा’

बहुत देर तक गहन सोच विचार के बाद रावण ने श्रीराम का आचार्य बनने का निमंत्रण खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। दूसरी ओर रावण के इस फैसले से सभा में बैठे सभी लोग आश्चर्य में पड़ गए। तब रावण ने कहा कि सभी लोग मुझे एक राक्षस के रूप में ही जानते हैं, लेकिन अब मुझे एक आचार्य के रूप में भी याद किया जाएगा। यह वही खास समय था जब रावण अपनी मुख से यह कहते हैं कि “शत्रु हो तो राम जैसा”
बताते चलें कि जामवंत जब शक्तिशाली और बलशाली राक्षस रावण के निमंत्रण स्वीकार कर लेने की खबर लेकर आता है तब भगवान श्रीराम भी बहुत प्रसन्न होते हैं और रावण के आदर व सत्कार के लिए तैयार हो जाते हैं।

दोस्तों हम सभी ने भगवान श्रीराम और रावण की कहानियां सुनी होगी, लेकिन यह गाथा शायद ही आपने पहले सुना होगा… रावण से हम सभी भले ही घृणा कर लें, लेकिन क्या आप जानते हैं कि रावण से बड़ा विद्वान और कोई नहीं था। रावण चाहता तो वह पूरे विश्व में राज करता लेकिन उसके घमंड और लालच ने ही उसको डूबो दिया।

याद रखें कि छल, कपट, धोखा, लालच और झूठ ज्यादा दिन नहीं टिकता है और इनको अपनाने वाले व्यक्ति की भी नाश रावण के ही तरह हो जाती है।

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