गीता धर्म ग्रंथ

भगवत गीता से जानें – क्या आप हैं एक सच्चे भक्त?

भगवत गीता से जानें कि आप एक सच्चे भक्त हैं

हम सभी जानते हैं कि भगवत गीता को लोग कितना पवित्र मानते हैं। अदालत में भी अगर कोई अपराधी अपनी बात को पेश करता है तो सबसे पहले उसे गीता पर हाथ रखकर कसम खिलाई जाती है और इंसान चाहकर भी झूठ नहीं बोल पाता है।

आज वेद संसार आपको भगवत गीता से जुड़ी एक खास बात बताने जा रहा है कि आप कैसे भगवत गीता की मदद से एक सच्चे भक्त की पहचान कर सकते हैं???

दरअसल, एक बार की बात है… एक बहुत महान संत हुआ करते थे जो अपने शिष्य के साथ रहा करते थे। एक बार उनके घर एक भक्त आया और उसने उन्हें प्रणाम करते हुए उन्हें एक बहुत कीमती पियाला भेंट किया और कहा कि – “हे संत महाराज मेरी ओर से इस छोटी सी भेंट को स्वीकार ज़रूर करें।”

फिर क्या संत ने भी उस पियाले को बड़े ही प्यार से स्वीकार कर लिया और उसे अपने शिष्य को देते हुए कहा कि – “आज के बाद जब भी तुम मुझे कुछ भी खाने को दोगे वह इसी में दिया करना परंतु इसका उपयोग बहुत ही सावधानी से करना ताकि इसे खरोंच कभी ना आने पाए।

वहीं, शिष्य अपनी गुरू की आज्ञा का पालन करते हुए रोज़ाना ही उन्हें उसी पियाले में खाना देने लगा। एक दिन वह उस पियाले को साफ़ कर रहा था कि वह पियाला उसके हाथ से ही छूटकर नीचे गिर गया और दो टुकड़ों में बंट गया। ऐसे में शिष्य बहुत घबरा गया और उसे लगने लगा कि आज तो उसकी खैर नहीं। गौरतलब है कि गुरू देव ने अपने शिष्य को खासकर के इस पियाले को संभालने के लिए और रखने के लिए दिया था लेकिन वह उसके हाथों से टूट गया।

गुरु ने शिष्य से पूछा – क्या अंत निर्धारित है?  

दूसरी ओर, शिष्य मन में यह विचार करता हुआ और घबराता हुआ पियाले के दोनों टुकड़े को लेकर और छिपाकर संत के पास गया और बोला गुरुदेव आप कहते हैं न कि हर किसी का अंत निर्धारित होता है।

क्या इस बात में सच्चाई है??? संत ने उसकी बात का जवाब देते हुए कहा कि – ”हां पुत्र यह सच है।”

फिर शिष्य ने सवाल किया कि – “आप कहते हैं दुनिया में मौज़ूद हर कीमती चीज़ एक न एक दिन ज़रूर टूट जाती है”

क्या इस बात में भी सच्चाई है? संत ने उत्तर दिया – ”हां यह भी सत्य है।”

अब शिष्य ने कहा कि आप कहते हैं – “हर प्राणी की हर वस्तु की एक निर्धारित उम्र है, जो एक न एक दिन ज़रूर खत्म हो जानी है”

यह भी सत्य है?  संत ने मुस्कुराते हुए कहा – ”हां बिल्कुल।”

बस संत के इस उत्तर को सुनते ही शिष्य ने अपने दोनों हाथ आगे करते हुए कहा – “महाराज ऐसा समझ लें कि इस पियाले की भी उम्र हो गई थी… इसलिए इसका भी अंत हो गया। दूसरी ओर अपने शिष्य की यह बात सुनकर संत हंसने लगा और कहने लगा कि ”सही बात कही तुमने बेटा… इस पियाले की उम्र हो गई थी और उसे गले लगा लिया।”

कहानी से मिली सीख – किसी भी इंसान को कोई कीमती चीज़ मिल जाने पर घमंड नहीं करना चाहिए और न ही किसी कीमती वस्तु के खत्म होने का शोक मनाना चाहिए और जो भी व्यक्ति ऐसा करता है, उस व्यक्ति को ही असली भक्त कहा जाता है।

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