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रामनवमी के एक दिन बाद मनायी जाती है यह खास एकादशी, जानें पूजा विधि व शुभ मुहूर्त!

दिवाली त्योहार के ठीक चार दिन पहले रमा एकादशी मनाया जाता है। इस दिन क्या पूजा विधि और व्रत कथा है आइए जानते हैं। rama ekadashi puja method.

हर महीने दोनों पक्षों यानी कि कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी का व्रत लोग रखते हैं। और इस तरह से देखा जाए तो हर 15वें दिन में एकादशी व्रत पड़ता है। एक माह में 2 एकादशी और पूरे साल यानि कि 12 माह में 24 एकादशी तिथियां आती हैं

वहीं, सनातन धर्म की बात करें तो एकादशी को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। जैसा कि हमने आपको बताया है कि एकादशी का व्रत ग्यारहवीं तिथि को किया जाता है इसलिए कामदा एकादशी का व्रत रामनवमी के एक दिन बाद यानि कि 23 अप्रैल 2021 को शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा

यह बात तो आप भलिभांति जानते होंगे कि एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु का पूजा किया जाता है। ज्योतिष शास्त्रों की मानें तो इस बार कामदा एकादशी पर 7 शुभ मुहूर्त बन रहें हैं।

आज वेद संसार आपको विस्तार से बताने जा रहा है कि कामदा एकादशी व्रत का क्या है महत्व और साथ ही शुभ मुहूर्त –

कामदा एकादशी का महत्व –

हमारी पौराणिक कथाओं के अनुसार कामदा का व्रत करने से जिन लोगों के भी कुंडली में राक्षस योनि है उन्हें बड़ी आसानी से छुटकारा मिल जाता है। मान्यता तो यह भी है कि अगर सुहागन स्त्रियां इस खास कामदा एकादशी का व्रत करती हैं तो उन्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति अवश्य होता है और साथ ही जातक की सभी मनोकामनाएं पूरी हो हो जाती हैं। यही नहीं, एकादशी व्रत के प्रभाव से आपके घर में सुख व शांति हमेशा बनी रहती है।

एकादशी तिथि का शुभ मुहूर्त –

कामदा एकादशी तिथि की शुरुआत – 22 अप्रैल 2021 को रात्रि 11 बजकर 35 मिनट से
कामदा एकादशी तिथि की समाप्ति – 23 अप्रैल 2021 को रात्रि 09 बजकर 47 मिनट तक
कामदा एकादशी व्रत के पारण का शुभ मुहूर्त – द्वादशी तिथि यानि 24 अप्रैल को सुबह 05 बजकर 47 मिनट से 8 बजकर 24 मिनट तक।
व्रत की पूरी अवधि – 2 घंटे 36 मिनट

कामदा एकादशी का शुभ मुहूर्त –

ब्रह्म मुहूर्त – 23 अप्रैल, 2021 की सुबह 04 बजकर 15 मिनट से लेकर 05 बजकर 03 मिनट तक।

अभिजित मुहूर्त – सुबह 11 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक।

विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 17 मिनट से शाम 03 बजकर 09 मिनट तक।

गोधूलि मुहूर्त – संध्याकाल 06 बजकर 23 मिनट से 06 बजकर 47 मिनट तक।

अमृत काल – मध्यरात्रि 12 बजकर 19 मिनट से 01 बजकर 49 मिनट यानि 24 अप्रैल तक

निशिता मुहूर्त – रात 11 बजकर 45 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 29 मिनट यानि कि 24 अप्रैल, 2021 तक।

एकादशी तिथि के अनुष्ठान दशमी तिथि से ही शुरु हो जाती है वहीं, दशमी तिथि को दोपहर का भोजन करके सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए ताकि आपके पेट में अन्न का अंश बिल्कुल भी ना रहे।

कामदा एकादशी – पूजा विधि

एकादशी तिथि की सुबह जल्दी से उठ जाएं और स्नान करने के बाद ही अपने व्रत का संकल्प लें। अब आप भगवान विष्णु के सामने शुद्ध घी का दीपक याद से जलाएं और इसके बाद ही मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का विधि-विधान के साथ पूजा और अर्चना करना चाहिए।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भगवान विष्णु को तुलसी प्रिय हैं इसलिए उन्हें तुलसी याद से अर्पित करें लेकिन एकादशी को तुलसी गलती से भी ना तोड़ें।

बताते चलें कि द्वादशी तिथि यानि अगले दिन पूजा करने के बाद ब्राह्मण या फिर आप किसी भी जरूरतमंद को भोजन कराएं और दान दक्षिणा भी दें और इसके बाद ही खुद खाएं।

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