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रामकृष्ण परमहंस कौन थे… जानें उनके खास 5 अनमोल वचन

प्रसिद्ध संतों में से एक रामकृष्ण परमहंस जिनके विचारों से प्रेरित थे स्वामी विवेकानंद। रामकृष्ण परमहंस को विवेकानंद अपना गुरु मानते थे और इसलिए उनके विचारों को लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने रामकृष्ण मठ की स्थापना भी कर डाली, जो आज भी बेलूर मठ के द्वारा संचालित है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रामकृष्ण मठ और मिशन नामक यह संस्था जन मानुष के कल्याण के लिए व उनके आध्यात्मिक विकास के लिए पूरे दुनिया में काम करती हैं।

रामकृष्ण जयंती कब मनायी जाती है

फाल्गुन द्वितीय तिथी शुक्ल पक्ष के दिन रामकृष्ण का जन्म हुआ था, इसलिए हर साल इस खास दिन पर रामकृष्ण जयंती मनायी जाती है।

रामकृष्ण परमहंस कौन थे

रामकृष्ण परमहंस एक महान विचारक थे, जिनके विचारों को खुद स्वामी विवेकानंद जी ने पूरी दुनियां में फैलाया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रामकृष्ण परमहंस जी ने सबी धर्मों को एक ही बताया था। उनका यह मानना था कि सभी धर्मों का आधार प्रेम, न्याय और परहित होता है। रामकृष्ण परमहंस जी ने एकता का भी प्रचार जमकर किया था। इनका जन्म 18 फरवरी सन् 1836 में हुआ था… हालांकि लोग इन्हें गदाधर के नाम से भी पुकारा करते थे।

रामकृष्ण परमहंस एक ब्राह्मण परिवार से थे और बहुत गरीब थे, लेकिन वह आस्था, सद्भावना एवं धर्म के धनि व्यक्ति थे और सदैव श्रद्धा व प्रेम पर ही विश्वास रखते थे। यह बहुत कम लोग जानते हैं कि रामकृष्ण परमहंस मां काली के प्रचंड भक्त थे और उन्होंने अपने आपको देवी काली को समर्पित भी कर दिया था। ऐसा कहते हैं कि रामकृष्ण परमहंस जी के अनमोल विचारों पर उनके पिता की छाया थी।

यही नहीं, उनके पिता धर्मपरायण सरल स्वभाव के व्यक्ति हुआ करते थे और यही सारे अच्छे गुण रामकृष्ण परमहंस में भी मौजूद थे। रामकृष्ण ने परमहंस की उपाधि प्राप्त की और साथ ही मनुष्य जाति को अध्यात्म का ज्ञान भी दिया। सभी धर्मों को एक बताया और अपने विचारों से कई लोगों को प्रेरित भी किया और वही लोगों ने आगे चलकर रामकृष्ण परमहंस के नाम को और अधिक बढ़ाया।

रामकृष्ण परमहंस की मौत इस रोग से हुई

रामकृष्ण परमहंस जी को गले का रोग हो गया था, जिस कारण उन्होंने 15 अगस्त, 1886 को अपने शरीर को छोड़ दिया और मृत्यु को प्राप्त हो गए थे। इनके खास अनमोल वचनों ने कई महान व्यक्तियों को जन्म दिया।

रामकृष्ण परमहहंस के खास 5 अनमोल वचन –

• खराब आईने में जैसे सूर्य की छवि दिखाई नहीं पड़ती है, वैसे ही खराब मन में भगवान की मूरत नहीं बनती।

• धर्म सभी समान हैं, वह सभी ईश्वर प्राप्ति का रास्ता दिखाते हैं।

• अगर मार्ग में कोई दुविधा ना आये तब समझना की राह गलत है।

• जब तक देश में व्यक्ति भूखा और निसहाय हैं, तब तक देश का हर एक व्यक्ति गद्दार हैं।

• विषयक ज्ञान मनुश्य की बुद्धि को सीमा में बांध देता हैं और उन्हें अभिमानी भी बनाता हैं।

दोस्तों बता दें कि ऊपर बताए गए रामकृष्ण परमहंस के खास वचनों के अलावा कई और वचन ऐसे भी हैं जो मनुष्य को जीवन का सही मार्ग दिखाता है और एक खुशहाल ज़िंदगी जीने की प्रेरणा भी देता है।

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