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नृसिंह जयंती क्या है, जानें पूजा विधि!

नृसिंह जयंती क्या है, जानें पूजा विधि

क्या आपके मन में कभी यह सवाल आया है कि सच्चा इंसान होकर भी आपको जीत हासिल क्यों नहीं हो पाती है। रोजाना भगवान को याद करना… पूजा-पाठ करना, सबकी हमेशा भलाई सोचना… एक सच्चे और अच्छे इंसान की ज़िंदगी बीताने पर भी आपको कभी खुशियां हासिल नहीं हो पाती है… यही कारण है कि नृसिंह जयंती मनायी जाती है। अब आप सोच में पड़ गए होंगे कि भला क्यों… क्योंकि इससे सच्चाई की जीत होती है और आपके काम में भी न्याय होगा।

नृसिंह जयंती क्यों मनायी जाती है –

नृसिंह देव भगवान विष्णु का ही एक रूप हैं और लोग भक्तों की रक्षा करने वाले भगवान नृसिंह जी की जयंती बड़ी धूमधाम के साथ मनाते हैं। नृसिंह देवता की पूजा को आप अगर सफल बनाना चाहते हैं, तो उन्हें ज़रूर फल फूल चढाएं, क्योंकि इससे आपको बहुत लाभ होगा। वहीं, आप अगर सच्चे रास्ते पर चलते हो तो आपके शत्रु और झूठों की हार होगी और साथ ही आपकी सच्चाई की जीत भी होगी। यही नहीं, शत्रु भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे और तो औऱ जो लोग रोजाना इस कथा को सुनते हैं व पढ़ते हैं उन्हें सब पापों से मुक्ति मिलती है और वह परमगति को प्राप्त हो जाते हैं।

वह बच्चे जो बहादुर बनकर भगवान के भक्त बनते है, ऐसे बच्चों की रक्षा स्वयं भगवान ही करते है। बता दें कि नृसिंह भगवान का सिर शेर का और शरीर इंसान जैसा था।

नृसिंह जयंती की कथा –

दैत्य हिरण्यकशिपु के घर भक्त प्रहलाद का जन्म हुआ था। वह बालक भगवान विष्णु के प्रति भक्ति भाव खूब रखा करता था। वहीं, हिरण्यकश्यपु ने अपनी सारी प्रजा को भी तंग करके रखा हुआ था। ऐसा खौफ बना हुआ था कि कोई भी व्यक्ति किसी भगवान की पूजा अर्चना नहीं कर सकता था। हिरण्यकश्य को जब किसी की पूजा करने की खबर मिलती तो वह उसे मरवा दिया करता था। वह बहुत ही घमंडी था और खुद को भगवान माना करता था। हिरण्यकश्यपु ने प्रहलाद  को बहुत समझाने की कोशिश की कि वह भगवान की भक्ति ना किया करें। दूसरी ओर जब प्रहलाद ने जब उसकी बात नहीं मानी तो उसने अपनी बहन होलिका के साथ षड्यंत्र किया। होलिका को एक विशेष वरदान प्राप्त था कि आग उसे जला कभी नहीं सकती है।

प्रहलाद को होलिका के गोद में बिठाकर उसे जलाकर मारने की कोशिश की। किसी ने सही कहा है कि कोई आपको बहुत परेशान करता है तो उस पापी के पाप का घड़ा भर जाए तो क्या होता है??? याद रखें कि जब किसी पापी के अत्याचारों का घड़ा भरता है तो भगवान किसी न किसी रुप में प्रकट होकर पापी का नाश जरूर करते हैं और वह अपने भक्त की रक्षा भी अवश्य करते हैं।

हिरण्यकशिपु को मारने के लिए भगवान ने पुरषोत्तम अर्थात अधिक मास बनाया और फिर भगवान ने नृसिंह अवतार लेकर दुष्ट, पापी एवं अहंकारी हिरण्यकशिपु को मार कर अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करी। सभी ने मिलकर प्रभु की स्तुति की तथा भगवान ने नृसिंह रूप में ही सभी को आशीर्वाद दिया।

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