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मासिक शिवरात्रि का क्या है महत्व और पूजा विधि

मासिक शिवरात्रि यूं तो हर महीने ही आती है, पर 2020 के दिसंबर माह में मासिक शिवरात्रि 13 दिसंबर को है। वहीं, हमारी हिन्दू पंचांग के अनुसार हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व भी है।

बता दें कि मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है। कहते हैं इस दिन भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने से आपकी सारी मनोकामनाएं, पूरी हो सकती हैं। ध्यान रहे कि मासिक शिवरात्रि के व्रत का महत्व बहुत अधिक होता है। और तो और इस दिन व्रत रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा की प्राप्ति भी होती है।

दूसरी ओर हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक शिवरात्रि के दिन व्रत रखने से इंसान को क्रोध, ईष्र्या, अभिमान और लोभ से मुक्ति मिलती है। मासिक शिवरात्रि आपके जीवन में सुख और शांति तो प्रदान करता ही है और साथ ही भगवान शिव की कृपा दृष्टि से उपासक के सारे बिगड़े काम आसानी से बन जाते है। साथ ही यह खास व्रत उनके लिए भी बहुत फलदायी होता है जिन्हें संतान प्राप्ति की चाह होती है और रोगों से मुक्ति के लिए भी किया जाता है।

मासिक शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त –

चतुर्दशी तिथि की शुरुआत – 13 दिसंबर, 2020 की सुबह 3 बजकर 52 मीनट से
चतुर्दशी तिथि की समाप्ति – 14 दिसंबर, 2020 की दोपहर 12:44 मीनट तक

मासिक शिवरात्रि की सही पूजा विधि –

मासिक शिवरात्रि के शुभ दिन सुबह-सुबह ऊठ जाएं और नहा-धो लें और उसके बाद घर के मंदिर में दीप जलाएं। हां, सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। और हां, अगर आपके घर में शिवलिंग है तो शिवलिंग का गंगा जल से ज़रूर अभिषेक करें। गंगा जल नहीं होने पर आप साफ पानी से भी भोले बाबा का अभिषेक कर सकते हैं।

वहीं, जिनके घर में शिवलिंग नहीं है वो भोले बाबा का ध्यान सच्चे मन से कर सकते हैं। भगवान शिव की आरती करें और भगवान शिव के साथ माता पार्वती की आरती भी करें। हां, इस दिन आप अपनी इच्छानुसार भगवान शंकर को भोग भी लगा सकते हैं। भगवान को सात्विक आहार का ही भोग लगाएं व भोग में कुछ मीठा शामिल ज़रूर करें।

मासिक शिवरात्रि की व्रत कथा… यहां पढ़ें –

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पौराणिक कथाओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव महाशिवरात्रि के दिन मध्य रात्रि के दौरान शिव लिंग के रूप में प्रकट हुए थे जिसके बाद सबसे पहले भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु ने ही उनकी पूजा की थी। बस उस दिन से लेकर आज तक इस दिन को भगवान शिव जन्म दिवस के रूप में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। बता दें कि इस दिन भगवान शिव की पूजा का खास महत्व माना जाता है।

बताते चलें कि बहुत से पुराणों में भी शिवरात्रि व्रत का ज़िक्र विस्तार से किया गया है। यही नहीं, हमारे शास्त्रों के अनुसार अपने जीवन के उद्धार के लिए माता लक्ष्मीं, सरस्वती, गायत्री, सीता, पार्वती तथा रति जैसी बहुत-सी देवियों और रानियों ने भी शिवरात्रि का व्रत किया था।

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