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मार्गशीर्ष पूर्णिमा पूजा का क्या है महत्व, जानें इसके लाभ व पूजा विधि

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मार्गशीर्ष पूर्णिमा का बहुत ही खास महत्व है। इस पावन पर्व पर गंगा समेत अनेक पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है। हरिद्वार समेत अनेक स्थानों पर लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं और अपने पापों से मुक्ति पाते हैं। वहीं, पूर्णिमा के स्नान पर पुण्य की कामना से स्नान का बहुत महत्व होता है। इस अवसर पर किए गए दान का अमोघ फल प्राप्त होता है। बता दें कि यह एक बहुत पवित्र अवसर माना जाता है जो सभी संकटों को दूर करके मनोकामनाओं की पूर्ति करता है।

यही नहीं, मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन व्रत एवं पूजन करने से भी सारे सुखों की प्राप्ति होती है। 12 दिसंबर 2019 के दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा का पूजन होना है। लोग इस दिन भगवान विष्णु नारायण की पूजा भी अवश्य करते हैं। नियमपूर्वक पवित्र होकर स्नान करके व्रत रखते हुए ऊँ नमो नारायण मंत्र का उच्चारण करना चाहिए… और तो और मार्गशीर्ष की पूर्णिमा को चन्द्रमा की पूजा भी अवश्य करनी चाहिए, क्योंकि इसी दिन चन्द्रमा को अमृत से सिंचित किया गया था। इस दिन कन्या और परिवार की अन्य स्त्रियों को वस्त्र प्रदान करना भी बहुत शुभ माना जाता है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा का क्या है महत्व –

मार्गशीर्ष का महीना श्रद्धा एवं भक्ति से पूर्ण माना जाता है। बता दें कि मार्गशीर्ष माह में पूरे महीने ही सुबह-सुबह के समय में भजन व कीर्तन हुआ करते हैं… भक्तों की मंडलियां सुबह के समय भजन और भक्ती गीत गाते हुए निकला करती हैं…  इस माह में श्रीकृष्ण भक्ति का विशेष महत्व बताया गया है। वहीं, दूसरी ओर पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सत युग में देवों ने मार्ग-शीर्ष मास की प्रथम तिथि को ही वर्ष का प्रारम्भ कर लिया था।

मार्गशीर्ष में नदी स्नान के लिए तुलसी की जड़ की मिट्टी व तुलसी के पत्तों से स्नान करना चाहिए…  स्नान के समय नमो नारायणाय या गायत्री मंत्र का उच्चारण करना बहुत फलदायी होता है।आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब यह पूर्णिमा ‘उदयातिथि’ के रूप में सूर्योदय से विद्यमान होते हैं, तो उस दिन नदियों या सरोवरों में स्नान करने तथा साम‌र्थ्य के अनुसार दान करने से आपके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं व साथ ही आपको पुण्य कि प्राप्ति होती है।

मान्यता तो यह भी है कि इस दिन दान-पुण्य करने से इंसान को बत्तीस गुना फल की प्राप्ति हो सकती है शायद यही कारण है कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा को बत्तीसी पूनम भी कहा जाता है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा की पूजा विधि –

इस खास दिन चाकोर वेदी बनाकर हवन किया जाता है… वहीं, हवन की समाप्ति के पश्चात के बाद भगवान का पूजन होता है तथा प्रसाद को सभी जनों में बांटा जाता है। खुद प्रसाद को ग्रहण करें और फिर ब्राह्यणों को भोजन ज़रूर कराये और अपने सामर्थ्य के अनुसार ही दान भी दें।यही नहीं, पूजा पश्चात सभी लोगों में प्रसाद वितरित करना चाहिए व भगवान विष्णु जी से मंगल व सुख की कामना करनी चाहिए। बताते चलें कि मार्गशीर्ष माह के संदर्भ में यह बात सामने आई है कि इस महीने में स्नान एवं दान का काफी खास महत्व बताया गया है…

इस माह में नदी स्नान का विशेष महत्व माना गया है, जिस प्रकार कार्तिक ,माघ, वैशाख आदि महीने गंगा स्नान के लिए अति शुभ एवं उत्तम माने गए हैं… ठीक उसी प्रकार मार्गशीर्ष माह में भी गंगा स्नान का विशेष फल प्राप्त होता है।

दूसरी ओर मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा का भी आध्यात्मिक महत्व खूब रहा है। जिस दिन मार्गशिर्ष माह में पूर्णिमा तिथि हो, उस दिन मार्गशिर्ष पूर्णिमा का व्रत करते हुए श्रीसत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा की जाती है जो अमोघ फलदायी होता है।

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