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शिक्षक दिवस: महाभारत और रामायण काल के 4 सर्वश्रेष्ठ गुरु… जिन्हें आज भी लोग करते हैं याद

                                                           गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरः                       

                                                            गुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः 

अब आप सोच रहे होंगे कि भला हम आपको यह दोहा क्यों सुना रहे हैं… दरअसल, शिक्षक दिवस का मौका है और ऐसे में वेद संसार आपको बताने जा रहा है महाभारत और रामायण काल के उन 4 सर्वश्रेष्ठ गुरु के बारे में, जिन्हें आज भी लोग याद किया करते हैं और जिनकी गाथा बच्चे भी सुनना पसंद किया करते हैं।

हमारे देश में प्राचिन काल से ही गुरु को हमेशा देवता की तरह पूजा जाता है और इसलिए कई सदियों से गुरु की पूजा की परंपरा चली आ रही है। फिर चाहे वह कोई देवता हो या फिर मनुष्य… सभी अपने-अपने गुरु को पूजनीय मानते हैं। कुछ लोग तो अपने गुरुओं को भगवान से भी ऊपर का दर्जा देते हैं।

हर साल 5 सितंबर को पूरा देश शिक्षक दिवस बड़े ही धूमधाम के साथ मनाता है। इस खास दिन हर इंसान अपने गुरु को सम्मान देता है। और तो और आज ही के दिन जाने माने विद्वान, शिक्षक, दार्शनिक और भारत के पहले उप-राष्टपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधा कृष्णन का जन्म भी हुआ था। देखा जाए तो डॉ. राधा कृष्णन ने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत सारे महान कार्य किये हैं, बस इसलिए उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है।

इस खास शिक्षक दिवस के मौके पर वेद संसार आपको विस्तार से बताने जा रहा है महाभारत और रामायण काल के 4 सर्वश्रेष्ठ गुरु के बारे में –

• महर्षि वाल्मीकि  

पवित्र हिंदू ग्रंथ रामायण को रचने वाले महर्षि वाल्मीकि ना सिर्फ भगवान श्री राम और लक्ष्मण के गुरु थे ,बल्कि उन्होंने ही श्री राम के पुत्रों लव और कुश को भी अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा प्रदान की थी। महर्षि वाल्मीकि की गाथा आज भी लोग याद करते हैं। इन्होंने ना सिर्फ शिक्षा प्रदान की थी, बल्कि कई तरह के अस्त्रों और शस्त्रों का आविष्कार भी किया था।

• महर्षि वेदव्यास 

क्या आप जानते हैं कि भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले महर्षि वेदव्यास को प्रथम गुरु का दर्जा प्राप्त है और इसलिए गुरु पूर्णिमा इन्हीं को समर्पित भी किया गया। बता दें कि वेदव्यास ने महाभारत के अलावा वेदों और साथ ही कुल 18 पुराणों की रचना कर डाली थी। ऋषि जैमिन और रोमहर्षण के साथ वैशम्पायन और मुनि सुमन्तु भी इन्ही के शिष्य कहलाया करते थे।

• गुरु द्रोणाचार्य 

कौरवों और पांडवों दोनों के ही गुरु – गुरु द्रोणाचार्य। यह ज्ञानी होने के साथ-साथ एक महान धनुधर्र भी थे। अर्जुन इनके सबसे काबिल शिष्यों में से एक थे। इनकी गाथा जो आज बच्चा-बच्चा तक जानता है, वह यह है कि – द्रोणाचार्य ने अपने वरदान की रक्षा के लिए गुरु दक्षिणा में एकलव्य से उसका अंगूठा तक मांग लिया था

• गुरु विश्वामित्र 

भगवान श्री राम और लक्षमण को अस्त्र व शस्त्र का ज्ञान देने वाले गुरु और कोई नहीं, बल्कि विश्वामित्र थे। कहा तो यह भी जाता है कि एक बार विश्वामित्र सभी देवताओं से गुस्सा गए थे और फिर गुस्से में उन्होंने एक अलग ही दुनिया की रचना कर डाली थी।

तो दोस्तों वेद संसार द्वारा बताए गए इन खास 4 गुरुओं के बारे में जानकर आपको भी अपने खास गुरु की याद आ गई हो, तो उन्हें तुरंत फोन या फिर मेसेज करें और धन्यवाद कहे… क्योंकि माता-पिता के बाद अगर वाकई में कोई हमारा भला चाहता है, तो वह गुरु ही होता है जो हमें सही राह दिखाता है और गलत होने पर फटकार भी लगाता है और जब हमें सफलता मिलती है, तो सबसे ज्यादा खुश भी वही होता है।

हमारे कमेंट बॉक्स पर बताए कि आपका प्रिय शिक्षक कौन है और आप उन्हें कैसे धन्यवाद कहेंगे… 

आप सभी को वेद संसार की पूरी टीम की ओर से शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !

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