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माघ मास पूर्णिमा के दिन गंगाजल में विराजते हैं यह भगवान!

क्या आप जानते हैं कि पूरे माघ मास के स्नान, दान, पुण्य, जप एवं तप का आखिरी पड़ाव माघ पूर्णिमा को माना जाता है। यूं तो हर एक पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण, मां लक्ष्मी एवं चंद्रदेव की पूजा-अर्चना का विधान है, पर माघ मास भगवान विष्णु को बहुत प्रिय होता है, इसलिए इस महीने की पूर्णिमा का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

इस साल यानि कि 2021 में माघी पूर्णिमा पूरे देश में 27 फरवरी को मनाया जाएगा। वहीं, इसी के साथ इस खास दिन संत रविदास जयंती भी मनाई जाएगी। बता दें कि इस दिन वाग्देवी यानि कि मां सरस्वती के स्वरुप ललिता महाविद्या की जयंती भी लोग मनाते हैं।

होली से ठीक एक महीने पहले इस पूर्णिमा पर ही होली का डांडा भी लगाया जाता है , इसलिए इसे होलिका डांडा रोपणी पूर्णिमा का भी नाम दिया गया है। दूसरी ओर बात अगर हमारे शास्त्रों की करें तो इस दिन चन्द्रमा यानि कि भगवान रजनीश अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत की वर्षा करते हैं।

पूर्णिमा स्नान का क्या है महत्व

ब्रह्मवैवर्त पुराण की मानें तो माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु गंगाजल में ही निवास करते हैं। और कहा तो यह भी जाता है कि इस दिन गंगाजल का स्पर्श मात्र भी मनुष्य को वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति देता है। आज के दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या घर पर ही मन में गंगा मैया का ध्यान कर स्नान करके भगवान श्री हरि की पूजा करनी चाहिए। मान्यता ऐसी भी है कि इस दिन गंगा आदि सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से आपके पाप एवं संताप का नाश हो जाता है। व साथ ही मन एवं आत्मा शुद्ध होती है।

और तो औऱ इस दिन किया गया महास्नान समस्त रोगों का नाश करके दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों से मुक्ति दिलाता है। ध्यान रहे कि स्नान और दान के वक्त ‘ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ का मानसिक जप अवश्य करते रहें। बताते चलें कि स्नान के बाद पात्र में काले तिल भरकर एवं साथ में शीत निवारक वस्त्र दान करने से धन और वंश में वृद्धि होती है।

यही नहीं, इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा करने से श्री विष्णु और मां लक्ष्मी की असीम कृपा भी हमेशा बनी रहती है। इसी के साथ सुख-सौभाग्य, धन-संतान की प्राप्ति ज़रूर होती है। इसके अलावा विद्या प्राप्ति के लिए इस दिन माँ सरस्वती की विधि-विधान से पूजा करने की भी परंपरा है और सफेद पुष्प अर्पित करके खीर का भोग भी अवश्य लगाना चाहिए।

यह बात जान लें कि इस दिन पितरों को तर्पण करना भी बहुत फलदायी माना जाता है, क्योंकि ऐसा करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है तथा आयु एवं आरोग्य में वृद्धि होती है। माघ पूर्णिमा पर स्नान करने से सूर्य और चंद्रमा जनित दोषों से भी मुक्ति मिलती है।

माघ स्नान का क्या है वैज्ञानिक दृष्टिकोण –

बताते चलें कि माघ पूर्णिमा स्नान को सिर्फ हमारे शास्त्रों में ही नहीं बल्कि वैज्ञानिकों ने भी माना है। जिस तरह माघ के महीने में ऋतु परिवर्तन होता है, ठीक उसी तरह नदी के जल में स्नान एवं सूर्य को अर्घ्य प्रदान करने से आपको रोगों से मुक्ति अवश्य मिलती है

दूसरी वजह यह भी है कि चंद्रमा का सम्बन्ध सीधे हमारे मन से होता है और इसलिए भी यह व्रत हमारे मन की पवित्रता और चित्त की शांति के लिए किया जाता है, जिससे हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जाओं का संचार होता है और आध्यात्मिकता का विकास भी।

दरअसल, सर्दी का आगमन और गमन दोनों ही रोगकारक होते हैं, इसलिए इस दौरान शरीर से विषैले पदार्थों का निष्कासन जरूरी माना गया है। व्रत करने से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। बस एक बात का ध्यान ज़रूर रखें कि भगवान विष्णु के व्रत में नियम, संयम, वाणी, कर्म और आचरण की पवित्रता का ध्यान रखना जरूरी है

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