ईवेंट हिन्दू पर्व

कालाष्टमी पर कुत्ते की पूजा, यह कैसी परंपरा?

यूं तो भगवान शिव के अनोखे स्वरूप हैं और उन्हीं एक स्वरूपों में एक रूप माना जाता है भगवान काल भैरव का… जिनका नाम बस लेने से नकारात्मक शक्तियों का नाश हो जाता है।

बहुत से लोग श्री काल भैरव अष्टमी को कालाष्टमी के नाम से भी बुलाते हैं। इस दिव्य तिथि पर शिव स्वरूप श्री काल भैरव की विशेष उपासना करके आपको अपने जीवन के ना जाने कितने ही कष्टों और बाधाओं से मुक्ति मिल सकती है।

ऐसी मान्यता है कि वैशाख मास की कालाष्टमी बहुत फलदायी मानी जाती है। यही नहीं, इस दिन भैरव के रूप में कुत्ते की पूजा होती है। क्यों आश्चर्य में पड़ गए ना कि आखिर कालाष्टमी पर कुत्ते की पूजा क्यों?

हिंदू शास्त्र के अनुसार काल भैरव का रूप विकराल और क्रोधी माना जाता है। जहां भैरव के एक हाथ में छड़ी होती है और उनका वाहन कुत्ता होता है। बता दें कि यही खास कारण है कि कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को भोजन करवाने का खास महत्व बताया गया है। जान लें कि जो भी व्यक्ति पूरे विधि विधान के साथ काल भैरव की पूजा व अर्चना करते हैं, उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और साथ ही उनके जीवन में आ रही नकारात्मक शक्तियों की बाधा दूर हो जाती हैं।

काल भैरव उपासना की महिमा –

• तंत्र साधना में खास रूप से शिव की तंत्र साधना में भैरव का विशेष महत्व माना गया है।

• वैसे तो भैरव जो हैं वह भगवान शिव जी के ही रौद्र रूप माने जाते हैं, लेकिन कहीं-कहीं इन्हें शिवजी का पुत्र भी कहा गया है।

• वहीं, कहीं-कहीं पर यह भी माना जाता है कि जो भी भगवान शिव के बताए मार्ग पर चलता है, वह भी भैरव ही कहलाता हैं।

• भैरव की बस उपासना करने से ही आपके सारे भय और अवसाद का नाश हो सकता है और तो और इनकी उपासना से इंसान को अदम्य साहस की प्राप्ति भी होती है।

• यही नहीं, शनि और राहु की बाधाओं से मुक्ति के लिए भैरव की पूजा काफी अचूक होती है।

• याद रखें कि मार्गशीर्ष महीने में भगवान भैरव की विशेष उपासना कालाष्टमी पर ही की जाती है।

इस खास काल अष्टमी में आप ज़रूर भैरव बाबा को दिल से याद करें, खासकर के बटूक भैरव और काल भैरव। हम आशा करते हैं कि उनकी कृपा से आपके सारे बिगड़े काम ज़रूर बन जाएंगे और आफ एक खुशहाल जीवन जीना शुरु कर देंगे।

ध्यान इस बात का रखें कि भैरव बाबा की पूजा करने के समय मन में किसी के लिए ना ही बुरी भावना लाए और ना ही लालच का मोह रखें। जो मांगे दिल से और सच्चे मन से मांगे आपकी मनोकामनाएं ज़रूर से पूरी होगी।

तो दोस्तों इस कालाष्टमी आप अपने आस पास के काले कुत्ते को प्रसन्न करें, उसे कभी भूखा ना रहने दें और जितना हो सके उतना सम्मान दें। काले कुत्ते का महत्व अब तो आपको समझ में आ ही गया होगा, इसलिए अब जब भी कहीं काला कुत्ता दिखें तो उसे प्रणाम ज़रूर करें।

Leave a Comment