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अक्षय तृतीया 2021: मां पार्वती ने क्यों दिया था तृतीया तिथि को अक्षय होने का वरदान!

अक्षय तृतीया का पावन पर्व हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को ही मनाया जाता है। यह खास पर्व इस बार 14 मई यानी की दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा।

मान्यता यह है कि त्रेता और सतयुग का आरंभ भी इसी तिथि को हुआ था और इसलिए इसे कृतयुगादि तृतीया भी कहा जाता है। वहीं, अनेकों शास्त्रों के अनुसार इस दिन स्नान, दान, जप, होम, स्वाध्याय, तर्पण आदि जो भी कर्म किए जाते हैं, वह सब अक्षय माने जाते हैं। यह खास तिथि सम्पूर्ण पापों का नाश करने वाली व साथ ही सभी सुखों को प्रदान करने वाली भी मानी जाती है। इस तिथि की अधिष्ठात्री और कोई नहीं बल्कि देवी पार्वती हैं।

बता दें कि बिना पंचांग देखे भी इस दिन आप कोई भी शुभ मांगलिक कार्य जैसे कि विवाह, गृह प्रवेश, घर, भूखंड या वाहन आदि की खरीदारी से सम्बंधित हर कार्य को कर सकते हैं। यही नहीं, तृतीया तिथि को पार्वती जी ने अमोघ फल देने की सामर्थ्य का आशीर्वाद भी दिया था और उस आशीर्वाद के प्रभाव से इस तिथि को किया गया कोई भी कार्य निष्फल कभी नहीं होता है।

इस शुभ दिन किया गया व्यापार आरम्भ, गृह प्रवेश, वैवाहिक कार्य, सकाम अनुष्ठान, दान-पुण्य,पूजा-पाठ अक्षय रहता है यानी कि वह कभी नष्ट नहीं होता। धर्मराज को इस तिथि का महत्व समझाते हुए माता पार्वती ने कहा था कि कोई भी स्त्री, जो किसी भी तरह का सुख चाहती है उसे यह व्रत करते हुए नमक का पूरी तरह से त्याग करना चाहिए। स्वयं में भी यही व्रत करके मैं भगवान शिव के साथ आनंदित रहती हूँ।

विवाह योग्य कन्याओं को भी उत्तम वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत ज़रूर करना चाहिए। जिनको संतान नहीं हो रही हो वह स्त्रियां भी इस व्रत करके संतान का सुख प्राप्त कर सकती हैं।

ज्ञात हो कि प्रजापति दक्ष की पुत्री रोहिणी इसी व्रत के कारण अपने पति चंद्र की सबसे प्रिय रानी रहीं। स्वर्ग के राजा इंद्र की पत्नी देवी इंद्राणी इसी व्रत के पुण्य प्रताप से जयंत नामक पुत्र की माँ बनी थी व देवी अरुंधति ने यही व्रत करके अपने पति महर्षि वशिष्ठ के साथ आकाश में सबसे ऊपर का स्थान प्राप्त किया था।

वहीं, दूसरी ओर हमारे शास्त्रों की बात करें तो इस माह में प्याऊ लगाना, छायादार वृक्ष की रक्षा करना, पशु-पक्षियों के खान-पान की व्यवस्था करना व राहगीरों को जल पिलाना जैसे सत्कर्म मनुष्य के जीवन को समृद्धि के पथ पर ले जाते हैं। और तो और स्कंद पुराण के अनुसार इस माह में जल दान का सर्वाधिक महत्व माना जाता है अर्थात अनेकों तीर्थ करने से जो फल प्राप्त होता है वह केवल वैशाख मास में जलदान करने से ही प्राप्त हो जाता है। इसके अलावा छाया चाहने वालों को छाता दान करना और पंखे की इच्छा रखने वालों को पंखा दान करने से भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों देवों का आशीर्वाद प्राप्त अवश्य होता है।

ध्यान रहे कि जो विष्णुप्रिय वैशाख में पादुका दान करता है,वह यमदूतों का तिरस्कार करके विष्णुलोक को जाता है। याद रहे कि इस माह में शिवलिंग पर जल चढ़ाना भी बहुत फलदायी माना गया है।

तो दोस्तों, वेद संसार द्वारा आपको इस बात की जानकारी मिल गई है कि मां पार्वती ने आखीर क्यों दिया था तृतीया तिथि को अक्षय होने का वरदान!

वेद संसार की पूरी टीम की ओर से आप सभी को अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएं!

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