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गायत्री जयंती 2019: जानें इसकी महिमा और शिव को प्रसन्न करने का मंत्र!

गायत्री जयंती पर शिव को प्रसन्न करने का मंत्र

दरअसल, गायत्री जयंती की तिथि को लेकर भिन्न-भिन्न मत सामने आते रहे हैं। जहां कुछ स्थानों पर इसे गंगा दशहरा और गायत्री जयंती की तिथि को एक समान बताई जाती है, तो वहीं कुछ इसे गंगा दशहरे के अगले दिन यानी कि ज्येष्ठ मास की एकादशी को मनाते हैं। यही नहीं, श्रावण पूर्णिमा को भी गायत्री जयंती के उत्सव को बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। बता दें कि श्रावण पूर्णिमा के दिन गायत्री जयंती को बहुत से स्थानों पर मनाया जाता है।

गायत्री जयंती की महिमा –

क्या आप जानते हैं कि गायत्री की महिमा में प्राचीन भारत के ऋषि-मुनियों से लेकर आधुनिक भारत के विचारकों तक अनेक बातें कही गई हैं। वहीं, वेद, शास्त्रों और पुराणों में तो गायत्री मां की महिमा गाते नहीं थकते हैं। दूसरी ओर, अथर्ववेद में भी मां गायत्री को आयु, प्राण, शक्ति, कीर्ति, धन और ब्रह्मतेज प्रदान करने वाली देवी कहा गया है।

बात अगर महाभारत के रचयिता वेद व्यास की करेंगे तो… उनका कहना है कि जैसे फूलों में शहद, दूध में घी सार रूप में होता है… ठीक वैसे ही समस्त वेदों का सार गायत्री को माना जाता है। ध्यान रहे कि अगर गायत्री को सिद्ध कर लिया गया तो यह कामधेनु (इच्छा पूरी करने वाली दैवीय गाय) के समान हो जाती है। बता दें कि जैसे मां गंगा आपके शरीर के पापों को धोकर तन मन को निर्मल करती हैंं… ठीक उसी प्रकार गायत्री रूपी ब्रह्म गंगा से आत्मा पवित्र हो जाती है।

वहीं, दूसरी ओर गायत्री को सर्वसाधारण तक पहुंचाने वाले विश्वामित्र का कहना है कि ब्रह्मा जी ने तीनों वेदों का सार तीन चरण वाला गायत्री मंत्र निकाला है। जान लें कि गायत्री से बढ़कर पवित्र करने वाला मंत्र और कोई नहीं है। जो भी व्यक्ति रोजाना सही तरीके से गायत्री मंत्र का जप करता है, वह सारे पापों से वैसे ही मुक्त हो जाता है जैसे कि केंचुली से छूटने पर सांप।

भगवान शिव की शास्त्रों में कई प्रकार की आराधना वर्णित है, परंतु शिव गायत्री मंत्र का पाठ सरल एवं अत्यंत प्रभावशील माना जाता है।

गायत्री जयंती पर जानें यह खास शिव गायत्री मंत्र –

‘ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।’

कहते हैं कि इस मंत्र का विशेष विधि-विधान नहीं है। इस मंत्र को किसी भी सोमवार से प्रारंभ कर सकते हैं। इसी के साथ सोमवार का व्रत करें तो श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त होंगे।

गायत्री जयंती पर कैसे करें भगवान शिव को प्रसन्न –

इस दिन याद से भगवान शिव के सामने घी का दीपक ज़रूर जलाएं। जब भी आप इस खास मंत्र की जाप करें, तो एकाग्रचित्त होकर ही करें। ध्यान रहे कि पितृदोष, एवं कालसर्प दोष वाले व्यक्ति को यह मंत्र रोज़ाना करना चाहिए। हालांकि सामान्य व्यक्तियों को भी इस मंत्र का जाप बहुत फायदा पहुंचाता है, जिससे भविष्य में कोई कष्ट नहीं आता है। बताते चलें कि इस जाप से इंसान को मानसिक शांति, यश, समृद्धि, कीर्ति प्राप्त होती है। यही नहीं, शिव की कृपा का प्रसाद मिलता है। किसी ने सही कहा है कि कोई भी आराधना अगर सच्चे मन से किया जाए, तो उसे सफलता अवश्य मिलती है।

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