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दत्तात्रेय कौन थे, कैसे इनकी पूजा से मिलती है दुख-दर्द से मुक्ति

साल 2020 में दत्तात्रेय जयंती 29 दिसंबर को मनाया जाएगा। इस खास दिन महायोगी प्रभु दत्तात्रेय को त्रिमूर्ति के संयुक्त रूप में पूजा किया जाता है। बता दें कि भगवान दत्तात्रेय वह ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का स्वरूप हैं।

वहीं, हमारी पौराणिक धर्म ग्रन्थों के अनुसार एक बहुत ही दिलचस्प घटनाक्रम के बाद जन्मे यह भगवान दत्तात्रेय का जीवन भी बेहद रोमांचक, ज्ञान और सीखों से भरा हुआ है। दूसरी ओर वैदिक मान्यताओं के अनुसार दत्तात्रेय में ईश्वर एवं गुरू दोनों रूप समाहित है बस इसी कारण उन्हें श्री गुरुदेवदत्त भी कहा जाता है

मान्यता तो यह भी है कि मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा पर जो भी व्यक्ति भगवान दत्तात्रेय की विधिवत पूजा करता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती है और साथ ही दु:ख व दर्द से उन्हें मुक्ति भी मिल जाती है।

दत्तात्रेय हैं भगवान विष्णु के स्वरूप –

गुरू दत्तात्रेय और कोई नहीं बल्कि त्रिदेवों का संयुक्त स्वरूप हैं और इन्हें गुरु और ईश्वर दोनों का ही स्वरूप भी माना जाता है। भगवान दत्तात्रेय के तीन मुख और छह हाथ भी हैं। जहां एक तरफ गाय और दूसरी ओर श्वान बैठे दिखाई देते हैं। मान्यता यह भी है कि गुरु दत्तात्रेय ने कुल 24 गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की थी और उनके गुरूओं में प्रकृति, पशु पक्षी, चींटी, अजगर और मनुष्य भी शामिल हैं।

दत्तात्रेय की सही पूजा और व्रत विधि –

भक्तों के बीच दत्तात्रेय जो हैं वह स्मृतिगामी के नाम से जाने जाते हैं। भगवान दत्तात्रेय के भक्त वातसल्य हैं और भक्तों के बस याद कर लेने भर से वह खुश हो जाते हैं और उनके दुख हरने चले आते हैं, यही कारण है कि उन्हें स्मृतिगामी कहा जाता है।

भगवान दत्तात्रेय की पूजा विधि काफी आसान है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन सुबह-सुबह नहा ले और फिर भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा, चित्र या फिर मन में उनका स्मरण करें और व्रत करने की प्रतिज्ञा लें। अगर संभव हो तो किसी पवित्र नदी अथवा कुंड में ज़रूर स्नान करें। और हां ध्यान रहे कि इस पूरे दिन दत्तात्रेय व्रत नियम का पालन आप अच्छा से करें। हां, कुत्ते और गाय को भोजन करवा सके तो याद से करवाएं।

अब आप भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा या फिर चित्र के पास बैठें और धूप, दीप, चंदन, हल्दी, मिठाई, फल, फूल आदि से पूजा पूरे सच्चे मन से करें। भगवान दत्तात्रेय को पीले फूल और पीली चीजें ही अर्पित करें। इस दौरान आप ओम द्रां दत्तात्रेयाय नमः मंत्र का जाप कर सकते हैं। इस शुभ दिन खुद को खुश रहे ही वह साथ ही अपने आस पास के अन्य लोगों को भी खुश रखें। पूजा के बाद दान और पुण्य के कार्य जितना हो सके उतना करें।

दत्तात्रेय व्रत के लाभ –

दोस्तों, अगर आप भी यह दत्तात्रेय व्रत रखने जा रहे हैं तो जान लें कि मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को भगवान दत्तात्रेय के निमित्त व्रत करने या उनके दर्शन भर कर लेने से आपकी सारी मनोकामनाएं जल्दी पूरी हो जाएंगी। भगवान दत्तात्रेय के व्रत और पूजन का बड़ा लाभ यह है कि इंसान गलत संगति और गलत रास्तों पर जाने से हमेशा बचा रहता है। और तो और संतान और ज्ञान प्राप्ति की कामनाएं भी पूरी होती हैं।

ना सिर्फ दत्तात्रेय की पूजा से सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है बल्कि जातक को जीवन में सुमार्ग पर चलने की प्रेरण मिलती है और पापों का अंत हो जाता है।

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