चाणक्य नीति

चाणाक्य नीति: कौन हैं वह 7 लोग जो कभी नहीं समझते दूसरों का दुख

चाणाक्य नीति - वह लोग जो कभी नहीं समझते दूसरों का दुख

हमारी ज़िंदगी में बहुत से लोग हमें मिलते हैं… जन्म से ही हमारा परिवार हमारे साथ रहता है और जैसे जैसे हम बड़े होते हैं घर से बाहर निकलना शुरु करते हैं, तो हमें कई नए लोग मिलते हैं। कुछ दोस्त के रूप में मिलते हैं, तो कुछ आपसे बड़े होते हैं जैसे कि गुरु आदि।

याद रखें दोस्त तो आपको कई मिलेंगे, लेकिन हर एक दोस्त को आप अपना करीबी नहीं बना सकते हैं। चाणाक्य ने अपनी कई नीतियों का उल्लेख किया है, जो हमारे जीवन के लिए फायदेमंद भी साबित हो चुकी है। चाणाक्य नीति के अनुसार ऐसे कुछ लोग हर एक के जीवन में होते हैं, जो कभी भी दूसरों का दुख नहीं समझ सकते हैं। याद रखें कि जो लोग कभी किसी दूसरे के दुख में मदद नहीं कर सकते हैं, तो उन्हें कभी दुसरों पर हंसना भी नहीं चाहिए।

ऐसे बहुत कम लोग ही होते हैं, जो दूसरों के दुख में सच में दुखी होते हैं और सामने वाले को सहानुभूति देते हैं, क्योंकि जिन लोगों के मन में किसी और के लिए दुख या पीड़ा की भावना नहीं होती, वह कभी भी किसी का दुख नहीं समझ सकते हैं, इसलिए अच्छा यही होगा कि आप ऐसे लोग के सामने अपना दुख भूलकर भी प्रकट ना करें।

चाणाक्य के अनुसार इन सबके अलावा अग्नि और कांटा भी किसी की पीड़ा नहीं समझ सकती है। बुद्धिमान व्यक्ति को इस बात का पता हमेशा रहना चाहिए कि कौन उसका दुख समझ सकता है और कौन नहीं समझ सकता है। ध्यान रहें कि कभी ऐसे लोग के सामने अपने दुख की बातें ना कहे, क्योंकि यह वही लोग होंगे जो आपके दुख को और बढ़ाएंगे और चार लोगों में आपकी चर्चा भी करेंगे।

चाणाक्य द्वारा बताए गए इस श्लोक को पढ़ें –

राजा वेश्या यमश्चाग्निस्तस्करो बालयाचकौ।
परदु:खं न जान्नति अष्टमो ग्रामकण्टक:।।

श्लोक का अर्थ है – चाणाक्य के इस श्लोक में यह बताया गया है कि राजा, यम, अग्नि, चोर, बालक, याचक और कांटा यह 7 कभी भी किसी की भावनाओं को नहीं समझ सकते हैं। यही नहीं, इन्हें किसी के भी दुख की कोई चिंता नहीं होती है औऱ ना ही यह ज्यादा फिक्र करते हैं, इसलिए इनके सामने अपना दुखड़ा रोने से कोई फायदा नहीं है…

राजा जहां सत्य और अपने नियम को ही ध्यान में रखकर न्याय करता है, इसलिए वह किसी का भी दुख नहीं समझ सकता है। यम यानी कि यमराज अगर किसी का दुख समझने लगे तो फिर दुनिया में कभी किसी की मृत्यु ही नहीं होगी। चोर कभी किसी के दुख को नहीं समझते तभी तो वह चोर कहलाते हैं वरना वह चोर बनते ही क्यों??? और रही बात बालक की तो बच्चे तो नादान होते हैं वह भला क्या किसी के दुख और पीड़ा को समझने की क्षमता रखते हैं।

दोस्तों हम आशा करते हैं कि वेद संसार द्वारा बताए गए चाणाक्य के इस खास नीति को जानकर आपकी आंखें ज़रूर खुल गई होंगी और अब आप हर किसी से भी अपने दुख की चर्चा नहीं करेंगे।

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