समस्या की बात करें तो भला आज तक कौन सा व्यक्ति ऐसा होगा, जो कभी भी किसी भी तरह के मुसीबतों से नहीं जूझा होगा। बहुत से लोग बहुत हिम्मतवाले होते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी लोग होते हैं, जो सम्सयाओं के सामने हार मान जाते हैं और अपनी ज़िंदगी को बोझ की तरह जीते हैं।

समस्याओं से निदान पाने के लिए कितने लोग पंडित, ज्योतिष आदि की मदद लेनी शुरू कर देते हैं। समस्या हर किसी के लाइफ में ज़रूर से आती है, जिसका सामना कैसे करना है यह आप पर निर्भर करता है। सम्सयाओं को देखकर भाग खड़ा होना यह कोई उपाय नहीं है। सम्सयाएं तो आएंगी ही और हर बार मामुली समस्या आएं यह ज़रूरी तो नहीं, इसलिए कोशिश यही रखें कि आप खुद को समस्याओं से लड़ने के लिए तैयार करें और डटकर उसका सामना करें।

आज वेद संसार आपको बताने जा रहा है चाणाक्य नीति द्वारा बताई गई वह एक काम जिसको अपनाकर आप मुसीबत के समय को बड़े ही आसानी से झेल लेंगे और खुशहाल जीवन व्यतित करेंगे।

चाणाक्य वह है जिसका बस नाम ही काफी है। कहते हैं लोग आज भी उनकी तरह विद्वान, ज्ञानी, समझदार और चालाक बनने की बस कल्पना ही कर सकता है, पर यह हकीकत रूप कब लेगा कोई नहीं जान सकता है। आज चाणाक्य की उस नीति के बारे में वेद संसार आपसे ज़िक्र करने जा रहा है, जिसको जानकर और अपनाकर आपकी भी मुसीबत ज़रूर से कम हो जाएगी।

चाणाक्य नीति – किस तरह से पाए अपनी मुसीबतों से छुटकारा

आचार्य चाणाक्य के अनुसार हम सभी को अपने मुसीबत के समय के लिए धन को जमा ज़रूर करना चाहिए, क्योंकि यह सत्य है कि मुसीबत की घड़ी में ना तो आपके दोस्त, रिश्तेदार या कोई और काम आएगा बल्कि अगर कोई वाकई में काम आएगा, तो वह होगा आपका संचय किया हुआ धन। यही कारण है कि चाणाक्य कहते हैं कि मुसीबत से बचने के लिए हर मनुष्य को धन की रक्षा करना बहुत आवश्यक है। वहीं, चाणाक्य एक बात यह भी कहते हैं कि पत्नी धन से बढ़कर होती है, इसलिए उसकी रक्षा धन से पहले करना चाहिए।

चाणाक्य के अनुसार इंसान को खुद की भी रक्षा ज़रूर से करनी चाहिए, क्योंकि खुद की रक्षा करने पर ही इंसान बाकी लोगों की रक्षा कर सकता है। यूं तो धन से ही व्यक्ति अपने बहुत से काम कर सकता है, लेकिन जब कभी भी लाइफ में परिवार की स्त्री, पत्नी आदि की रक्षा की बात आए, तो उसकी मान-मर्यादा पर कभी हानि नहीं आने देना चाहिए। याद रखें कि अगर आपके परिवार का मान-सम्मान है तभी आपका मान-सम्मान भी कायम रहेगा।

चाणाक्य ने अपनी नीति में यह भी बात कही है कि लक्ष्मी बहुत चंचल होती है… इसका कोई भरोसा नहीं किया सकता है कि यह कब आपको धोखा दे जाए और नष्ट हो जाए। जब बुरा समय आता है तब इंसान का सब कुछ नष्ट हो जाता है, फिर वह धन ही क्यों ना हो। यही कारण है कि चाणाक्य हमेशा से कहते आए हैं कि किसी भी धनवान व्यक्ति को यह भूलकर भी नहीं समझना चाहिए कि उस पर विपत्ति कभी आएगी ही नहीं।

दोस्तों यह एक नियम बना लें और अपने मुसीबत के समय के लिए धन को बचाना शुरू कर दें।

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