चाणक्य नीति

वैवाहिक जीवन में है उथल-पुथल… तो चाणक्य की यह 4 बातें अपनाएं!

चाणक्य और उनकी नीतियों की गाथा जग-जग में जाहिर है। यूं तो चाणक्य ने कई नीतियों का उल्लेख किया है और उन्हीं में से एक है कि आप अपने दांपत्य जीवन को किस प्रकार से सुखी बना सकते हैं।

चाणक्य और उनकी नीतियों की गाथा जग-जग में जाहिर है। यूं तो चाणक्य ने कई नीतियों का उल्लेख किया है और उन्हीं में से एक है कि आप अपने दांपत्य जीवन को किस प्रकार से सुखी बना सकते हैं।बहुत से लोगों के वैवाहिक जीवन में आए दिन लड़ाई-झगड़ा, एक दूसरे से रूठना व मनाना लगा ही रहता है। वहीं, कुछ लोगों के वैवाहिक जीवन में इतनी ज्यादा उथल-पुथल मची रहती है कि वह अलग तक हो जाने के लिए तैयार हो जाते हैं। दोस्तों, यह सत्य है कि वैवाहिक जीवन का सुख होना तभी संभव हो पाता है, जब पति-पत्नी के रिश्ते अच्छे हों। पति-पत्नी एक-दूसरे की भावनाओं को समझते हुए हमेशा हर परिस्थिति में साथ चलें। यही नहीं, पति-पत्नी एक-दूसरे का सम्मान करें और हां, अगर दोनों के बीच रिश्ते खराब हों, तो दांपत्य जीवन ही नहीं दो परिवारों में कलह की स्थिति साफ देखने को मिलती है।

आज वेद संसार आपको बताने जा रहा है कि चाणक्य द्वारा उनकी नीति में बताई गई वह 4 खास बातें जिन्हें अपनाकर आप अपने दांपत्य जीवन में सुख-शांति बरकरार रख सकते हैं – 

• पति-पत्नी के बीच प्रेम और सौहार्द का होने बेहद ज़रूरी –

जी हां दोस्तों, किसी भी पति-पत्नी के बीच प्रेम और सौहार्द का होना बहुत ज़रूरी माना जाता है, क्योंकि ऐसा होने से आपके घर में किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं आती है और तो और आपके घर का वातावरण हमेशा खुशहाल बना रहेगा। वहीं, अगर आपके वैवाहिक जीवन में प्रेम और सौहार्द में कमी आ जाती है, तो आपके घर का माहौल भी खराब हो जाता है। बस इसलिए आचार्य चाणक्य के अनुसार पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और सौहार्द का होना बेहद जरूरी माना जाता है।

• पति-पत्नी को साथ व्यतीत करना चाहिए समय –

आचार्य चाणक्य की नीतियों की मानें तो अपने वैवाहिक जीवन को मजबूत बनाने के लिए हर पति-पत्नि को साथ में समय व्यतीत ज़रूर करना चाहिए। ऐसा करने से आपका रिश्ता मजबूत तो होगा ही व साथ ही पति-पत्नि के रिश्ते में दूरियां भी कभी नहीं आएगी। आप देखेंगे कि जब कभी पति-पत्नी के बीच दूरियां बढ़ने लग जाती है, तो इसका सीधा असर घर-परिवार पर भी पड़ने लगता है और घर-परिवार में भी कई तरह की समस्याएं आने लग जाती हैं।

• पति-पत्नी को समझना चाहिए एक-दूसरों की जरूरते –

चाणक्य की एक नीति यह भी कहती है कि किसी भी पति-पत्नी को एक दूसरे की जरूरतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे रिश्ते में दूरियां आ जाती हैं। पति-पत्नी का रिश्ता बहुत पवित्र होता है और इस रिश्ते को कायम रखने के लिए एक दूसरे की जरूरतों को समझना बहुत जरूरी है। और तो और एक-दूसरे की भावनाओं को समझकर भी हमेशा कार्य करना चाहिए।

• पति-पत्नी हर काम मिलकर करें –

बताते चलें कि आचार्य चाणक्य की चौथी बात यह कहती है कि पति-पत्नी एक रथ के दो पहिए होते हैं। जिस प्रकार रथ तब ही चल सकता है, जब उसके दोनों पहिए ठीक से चलेंगे, वैसे ही वैवाहिक जीवन भी तब ही चल पाएगा, जब हर पति-पत्नि मिलकर कार्य करेंगे। पति-पत्नी के रिश्ते में प्रतिस्पर्धा की भावना गलती से भी नहीं होनी चाहिए। जान लें कि अगर पति-पत्नी में एक दूसरे को लेकर प्रतिस्पर्धा की भावना आ जाती है, तो रिश्ते में दूरियां बढ़ने लग जाती हैं।

वेद संसार यह आशा करता है कि हर पति-पत्नी चाणक्य की इन नीतियों को ज़रूर पालन करेंगे और एक खुशहाल वैवाहिक जीवन का आनंद उठाएंगे।

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