आरतियाँ

श्री राधा जी की आरती व आरती का महत्व और नियम

श्री राधा जी की आरती व आरती का महत्व और नियम

ॐ जय श्री राधा जय श्री कृष्ण

ॐ जय श्री राधा जय श्री कृष्ण
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

घूम घुमारो घामर सोहे जय श्री राधा
पट पीताम्बर मुनि मन मोहे जय श्री कृष्ण .
जुगल प्रेम रस झम झम झमकै
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

राधा राधा कृष्ण कन्हैया जय श्री राधा
भव भय सागर पार लगैया जय श्री कृष्ण .
मंगल मूरति मोक्ष करैया
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

यहां जानें – आरती का महत्व व नियम

आरती को “आरार्तिक’ और “नीरंजन” भी कहा जाता है। ध्यान रहें कि आरती के दौरान अगर आप मंत्रों का उच्चारण करते हैं तो यह आपके लिए और भी अच्छा होगा लेकिन अगर ना भी करें, तो शुद्ध मन से दीपक या कपूर के साथ की गई आरती भी आपकी मनोकामना को सिद्ध कर सकती है।

आरती में शंख और बाती का महत्व

वहीं, जब भी आप आरती करें उसमें घंटी और शंख का वादन अवश्य शामिल करें। बता दें कि इससे जहां आपके आस-पास का वातावरण शुद्ध होता है वहीं, आपके घर की सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा इन पवित्र ध्वनियों की गूंज से बाहर निकल जाएगी। साथ ही आपकी प्रार्थना बिना किसी बाधा के भगवान तक पहुंचती है।

यही नहीं, दीपों या बातियों की संख्या को लेकर भी ध्यान अवश्य रखें कि यह एक, पांच या फिर सात के क्रम में ही हो। वहीं, अगर आप आरती के लिए कपूर का प्रयोग कर रहे हो तो उसमें भी यही नियम लागू होगा।

आरती के पांच तत्व

क्या आप जानते हैं कि आरती के पांच तत्व माने गए हैं – पहला दीपक, दूसरा शुद्ध जल या गंगाजल युक्त शंख, तीसरा स्वच्छ वस्त्र, चौथा आम या फिर पीपल के पवित्र पत्ते और पांचवा दंडवत प्रणाम करना।

दोस्तों आरती चाहे प्रात:काल की हो या फिर संध्याकालीन, या किसी विशेष पूजा की आरती ही क्यों ना हो… उसमें इन पांचों विधियों का क्रमानुसार पालन अवश्य किया जाना चाहिए।

आरती में शंख के जल का महत्व

ध्यान रहें कि शंख में रखे जल को आरती में उपस्थित सभी लोगों पर छिड़काव अवश्य से करें क्योंकि इससे उन्हें पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है और जीवन की परेशानियां भी समाप्त हो जाती हैं।

आरती में दीप घुमाने का नियम

हम सब जब आरती करते हैं तब दीप ज़रूर से घुमाते हैं लेकिन क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है कि आखिर दीप घुमाने का क्या है नियम… कितनी संख्या होनी चाहिए दीप घुमाने वक्त… आरती शुरु करते हुए सर्वप्रथम इसे भगवान के चरणों में चार बार, तत्पश्चात नाभि के पास दो बार घुमाते हुए मुखमंडल पर दीपक ले जाएं और फिर वहां एक बार घुमाएं। इसके पश्चात समस्त अंगों पर कम से कम सात बार या इससे अधिक आरती घुमाएं।

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